बुजुर्गों के सम्मान में झुका प्रशासन, अंगदान के संकल्प से रोशन हुई मानवता की राह

कलेक्टर रोक्तिमा यादव और एसपी हरीश राठौर ने स्वयं का स्वागत कराने के बजाय वरिष्ठजनों को दिया सम्मान, बोलीं—इन अनुभवों की खान का आशीर्वाद किसी पुरस्कार से कम नहीं
छत्तीसगढ़ –
सम्मान की असली गरिमा पद और प्रतिष्ठा में नहीं, बल्कि उन लोगों के प्रति आदर में है, जिन्होंने अपने जीवन के अनुभवों से समाज को सींचा है। अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर कोरिया में कुछ ऐसा ही भावुक और प्रेरणादायी दृश्य देखने को मिला, जब कलेक्टर रोक्तिमा यादव और पुलिस अधीक्षक हरीश राठौर ने स्वयं का स्वागत कराने के बजाय वरिष्ठजनों के सम्मान को प्राथमिकता दी। यह पहल केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बुजुर्गों के प्रति कृतज्ञता और संवेदनशील प्रशासन की सुंदर मिसाल बन गई।

कलेक्टर श्रीमती यादव ने कहा कि वृद्धजन दिवस पर सम्मान के वास्तविक अधिकारी हमारे वरिष्ठजन हैं। जिन्होंने जीवनभर हमारा हाथ थामकर आगे बढ़ना सिखाया, आज उनका हाथ थामना हमारी जिम्मेदारी है। उनका आशीर्वाद किसी पुरस्कार से कम नहीं। उन्होंने नई पीढ़ी से बुजुर्गों के साथ समय बिताने, संवाद करने और उनके अनुभवों को जीवन की पूंजी मानने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में सम्मान के साथ मानवता की एक और प्रेरक तस्वीर सामने आई, जब नागरिकों ने मरणोपरांत अंगदान और देहदान का संकल्प लिया। शैलेश शिवहरे, अनिल शर्मा, लालसाय चिकंजुरी, विकास मित्रा एवं एक सेवानिवृत्त सैनिक ने संपूर्ण अंगदान, विमला भगत और अजय कुमार साहू ने नेत्रदान तथा भूपेंद्र कुमार पॉल ने देहदान के लिए पंजीयन कराया। इनके निर्णय ने संदेश दिया कि सेवा की भावना जीवन के बाद भी किसी जरूरतमंद के लिए नई जिंदगी बन सकती है।

वरिष्ठजनों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए कोरिया मे आयोजित निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में 2500 से अधिक लोगों ने पंजीयन कराया। जांच, चिकित्सकीय परामर्श, दवा वितरण तथा आयुष्मान एवं आभा कार्ड की सुविधाएं दी गईं। वहीं 18 दिव्यांगजनों एवं बुजुर्गों को सहायक उपकरण वितरित किए गए।

कोरिया प्रशासन की यह पहल सम्मान, स्वास्थ्य सेवा और मानवीय संवेदना का ऐसा संगम बनी, जिसने समाज को याद दिलाया कि बुजुर्ग बोझ नहीं, हमारी सबसे मूल्यवान विरासत हैं।

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