सुखदेव भगत के आते ही छत्तीसगढ़ कांग्रेस का सियासी तेवर तेज, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सड़क पर उतरे दिग्गज
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नए प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत की एंट्री के साथ ही पार्टी ने अपना राजनीतिक तेवर तेज कर दिया है। प्रदेश प्रभारी बनने के बाद अपने पहले बड़े आंदोलन में भगत राजधानी रायपुर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़क पर उतरे। राजीव गांधी चौक से कलेक्ट्रेट तक निकले मार्च में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
SIR और मतदाता सूची बना कांग्रेस के आंदोलन का केंद्र-

कांग्रेस का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया और मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों ने चुनावी पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी इसी मुद्दे को आधार बनाकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है। वहीं छत्तीसगढ़ के कई जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसी मुद्दों पर प्रदर्शन, धरना व पुतला दहन किया और कई स्थानों पर पुलिस से झड़प की स्थिति भी इससे बनते देखी गई l
वैसे कांग्रेस का विरोध केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है। देश के विभिन्न हिस्सों में पार्टी इसी मुद्दे पर प्रदर्शन कर रही है। वहीं, चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर उठाए गए सवालों और निर्णय प्रक्रिया को लेकर उठ रहे आरोपों का खंडन किया है। वैसे हाल में चुनाव आयोग के भीतर निर्णयों को लेकर कथित मतभेदों की रिपोर्ट भी सामने आई है, जिसे कांग्रेस अपने आरोपों के समर्थन में उठा रही है।
सुखदेव भगत के सामने पहली राजनीतिक परीक्षा-
सुखदेव भगत के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन को छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संगठनात्मक स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रभारी के तौर पर उनकी पहली सक्रिय राजनीतिक मौजूदगी में प्रदेश के लगभग सभी प्रमुख कांग्रेस चेहरे एक मंच पर दिखाई दिए। इससे पार्टी के भीतर सामूहिक नेतृत्व और केंद्रीय मुद्दों पर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश साफ नजर आई।

आने वाले समय में भगत के सामने छत्तीसगढ़ मे संगठन को सक्रिय करने, वरिष्ठ नेताओं के बीच बेहतर समन्वय बनाने और कार्यकर्ताओं को आंदोलनों से जोड़ने की चुनौती होगी। ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर कांग्रेस का आक्रामक रुख भी इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा दिखाई देता है।
आंदोलन से क्या बदलेगा सियासी समीकरण?
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस विपक्ष की भूमिका को सड़क के आंदोलन से मजबूत करने की कोशिश कर रही है। वरिष्ठ नेताओं की संयुक्त मौजूदगी से कार्यकर्ताओं के बीच सक्रियता बढ़ाने का प्रयास दिखा है। हालांकि, इन प्रदर्शनों का दीर्घकालिक राजनीतिक असर संगठन की निरंतरता, स्थानीय मुद्दों और जनता के बीच इस अभियान की स्वीकार्यता पर निर्भर करेगा।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि सुखदेव भगत के आगमन के साथ छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने शुरुआत ही एक बड़े राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दे पर आक्रामक आंदोलन से की है और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को कांग्रेस पार्टी ने अपने प्रमुख राजनीतिक अभियानों में अब शामिल कर लिया है।






