नल तो लगे, पानी गायब! छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन पर CAG के खुलासे ने खोली पोल
40.10 लाख कनेक्शनों में 13.31 लाख गैर-कार्यशील, अधूरे काम के बावजूद ‘हर घर जल’ का प्रमाणन—अब केंद्र से विशेष जांच टीम की मांग
छत्तीसगढ़ में हर घर तक नल से पानी पहुंचाने की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना पर सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच खाई अब सवाल नहीं, गंभीर जांच का विषय बन चुकी है। करोड़ों-अरबों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि नल सूखे हैं, टंकियां अधूरी हैं और कागजों में गांव ‘हर घर जल’ बन चुके हैं, तो आखिर जवाबदेही किसकी है?
पता हो भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की 2026 की प्रदर्शन ऑडिट रिपोर्ट ने छत्तीसगढ़ में मिशन के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2025 तक 50 लाख घरों को नल कनेक्शन देने के लक्ष्य के मुकाबले 40.10 लाख FHTC लगाए गए, लेकिन जनवरी 2025 तक इनमें 13.31 लाख यानी 33 प्रतिशत कनेक्शन गैर-कार्यशील पाए गए। कारणों में सूखे जलस्रोत, अधूरी ओवरहेड टंकियां, बिजली कनेक्शन की कमी और सोलर पंप का न लगना शामिल है।

जिससे अब सबसे बड़ा सवाल ‘हर घर जल’ के दावों पर है। CAG के मुताबिक मार्च 2024 तक लक्ष्य 19,656 गांवों के प्रमाणन का था, लेकिन सिर्फ 716 गांव यानी 3.64 प्रतिशत ही प्रमाणित हुए। ऑडिट में अधूरे कार्यों के बावजूद गांवों के ‘हर घर जल’ प्रमाणन के मामले भी सामने आए।
जल जीवन मिशन के वित्तीय मोर्चे पर भी तस्वीर चिंताजनक है। CAG के अनुसार मार्च 2024 तक मिशन पर ₹11,034.26 करोड़ खर्च होने के बावजूद योजना के क्रियान्वयन में कमजोर योजना, वित्तीय संसाधनों की कमी, कमजोर निगरानी और टिकाऊ जलस्रोत सुनिश्चित नहीं करने जैसी कमियां मिलीं। ऑडिट ने यह भी कहा कि FHTC की रिपोर्टिंग वास्तविक कार्यशीलता सुनिश्चित किए बिना अधिक दिखाई गई और गलत ‘हर घर जल’ प्रमाणन ने योजना को बुरी प्रभावित किया।

ऐसे में सरगुजा और बस्तर समेत प्रदेश के दूरस्थ इलाकों में सरकारी आंकड़ों और धरातलीय स्थिति का स्वतंत्र मिलान बेहद जरूरी है। जिसमे मंत्री, मंत्रालय, ठेकेदारों, क्रियान्वयन एजेंसियों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी गहन जांच होनी चाहिए।
छत्तीसगढ़ मे जल जीवन मिशन मे लगातार बह रही भ्र्ष्टाचार की गंगा को रोकने व इसे मैली करने वालों को दण्डित करने के लिए जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्त्ता, व प्रभावित जनो द्वारा अब केंद्र सरकार से मांग की जा रही है कि छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन की विशेष जांच टीम गठित की जाए, जो दस्तावेजों के साथ गांव-गांव जाकर पाइपलाइन, टंकी, जलस्रोत, कनेक्शन और वास्तविक जलापूर्ति की जांच करे। साथ ही इसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं की भागीदारी वाली स्वतंत्र सामाजिक निगरानी व्यवस्था भी बनाई जाए।
क्योंकि सवाल सिर्फ पाइप और टंकियों का नहीं है—सवाल उस भरोसे का है, जिसके नाम पर जनता के लिए हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।





