कोरिया में अवैध शराब का खेल! चारपहिया वाहन से बिक्री के आरोप, आबकारी विभाग पर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ में आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल जगह-जगह अवैध शराब के ठिकानों के बाद अब चारपहिया वाहनों से बिक्री! जनप्रतिनिधियों की शिकायते भी बेअसर –
छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में अवैध शराब के कारोबार को लेकर आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि जिले में अवैध शराब बेचने वाले कोचियों के हौसले इस कदर बढ़ गए हैं कि अब वे केवल जगह-जगह अस्थायी ठिकाने बनाकर ही नहीं, बल्कि चारपहिया वाहनों में शराब रखकर घूम-घूमकर खुलेआम बिक्री कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि कोरिया सहित एमसीबी और सरगुजा संभाग के कई हिस्सों में अवैध शराब बिक्री की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। कोरिया के बंजारीडांड क्षेत्र में चारपहिया वाहन से शराब पकड़े जाने की घटना को भी इसी स्थिति का उदाहरण बताया जा रहा है।
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई पर सवाल- स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा अवैध शराब बिक्री को लेकर आवाज उठाए जाने के बावजूद आबकारी विभाग की कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। विपक्षी दलों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग द्वारा कई मामलों में प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय केवल औपचारिकता पूरी की जाती है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अवैध शराब कारोबारी वाहनों में शराब लेकर खुलेआम घूमकर बिक्री करने का साहस कर रहे हैं, तो संबंधित विभाग की निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था आखिर कितनी प्रभावी है?
भ्रष्टाचार के आरोपों ने बढ़ाई चिंता- विपक्षी नेताओं और स्थानीय स्तर पर उठ रही आवाजों में आबकारी विभाग के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और कथित संरक्षण के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप यह भी है कि विभागीय स्तर पर प्रभावी निगरानी नहीं होने के कारण अवैध शराब कारोबारियों को लगातार बढ़ावा मिल रहा है।

नशामुक्त समाज की बात और जमीनी हकीकत में विरोधाभास? इस संदर्भ मे वैसे एक ओर छत्तीसगढ़ शासन नशामुक्त समाज की दिशा में अभियान चलाने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर अवैध शराब की बिक्री के आरोप सरकार की मंशा और जमीनी स्तर पर निगरानी व्यवस्था के बीच कथित विरोधाभास को उजागर करते हैं।
यदि अवैध शराब की बिक्री वास्तव में इस स्तर तक पहुंच गई है कि कारोबारी वाहनों में शराब लेकर खुलेआम घूम रहे हैं, तो यह केवल आबकारी विभाग के लिए ही नहीं बल्कि कानून-व्यवस्था और जनस्वास्थ्य के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।
सागर जैसी घटना से सबक लेने की जरूरत-
अवैध शराब के मामले में प्रशासन को मध्यप्रदेश के सागर जिला जैसे बड़ी घटना का इंतजार नहीं करना चाहिए। जहरीली या मिलावटी शराब के सेवन से होने वाली घटनाएं यह बताती हैं कि अवैध शराब का कारोबार केवल राजस्व चोरी का मामला नहीं, बल्कि सीधे तौर पर लोगों की जान से जुड़ा गंभीर खतरा है।
ऐसे में कोरिया, एमसीबी और पूरे सरगुजा संभाग में अवैध शराब के ठिकानों, कोचियों और वाहनों के माध्यम से होने वाली बिक्री की व्यापक जांच की जरूरत है। केवल कुछ छोटी कार्रवाई करके मामला समाप्त करने के बजाय अवैध शराब के नेटवर्क की जड़ तक पहुंचना आवश्यक है।
अब निगाहें विभाग की अगली कार्रवाई पर-
सबसे अहम सवाल यही है कि क्या आबकारी विभाग बंजारीडांड में पकड़े गए वाहन और उससे जुड़े पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच करेगा? क्या जिले में सक्रिय अवैध शराब विक्रेताओं और कोचियों की सूची तैयार कर उनके खिलाफ अभियान चलाया जाएगा? और क्या उन अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय होगी, जिनके क्षेत्र में लंबे समय से अवैध शराब बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं?
विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे मंत्री अथवा मंत्रालय स्तर से कथित संरक्षण के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है
क्योंकि सवाल सिर्फ अवैध शराब बिक्री का नहीं है—सवाल यह है कि शासन के नशामुक्त समाज के संकल्प के बीच आखिर अवैध शराब का कारोबार इतनी बेखौफ स्थिति तक कैसे पहुंच रहा है?
अब देखना होगा कि आबकारी विभाग इन आरोपों पर सिर्फ खानापूर्ति करता है या वास्तव में अवैध शराब के पूरे नेटवर्क पर शिकंजा कसता है।





