यूएनएससी में भारत की स्थायी सीट की मांग तेज- बदलती दुनिया में प्रतिनिधित्व का सवाल

वैश्विक शक्ति-संतुलन बदला- अब सुरक्षा परिषद की संरचना बदलने की बारी
नई दिल्ली – संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत को स्थायी सदस्यता देने की मांग लगातार अंतरराष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में बनी हुई है। 1945 में बनी सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना में पांच स्थायी सदस्य—अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन—हैं, जबकि दस देश अस्थायी सदस्य के रूप में दो वर्ष के लिए चुने जाते हैं।

भारत का पक्ष है कि आज की वैश्विक राजनीतिक, आर्थिक और सामरिक वास्तविकताओं को सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलता। भारत सुरक्षा परिषद का आठ बार 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92, 2011-12 और 2021-22 अस्थायी सदस्य रह चूका है

भारत की स्थायी सदस्यता के समर्थन में कई प्रमुख देश सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति रख चुके हैं। ब्रिटेन लंबे समय से भारत के साथ जर्मनी, जापान और ब्राजील के लिए नई स्थायी सीटों तथा अफ्रीका के स्थायी प्रतिनिधित्व का समर्थन करता रहा है। ब्रिटिश सरकार का कहना है कि सुरक्षा परिषद को आज की दुनिया का अधिक प्रतिनिधि बनना चाहिए।

भारत, जर्मनी, जापान और ब्राजील का जी-4 समूह भी सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों के विस्तार की मांग करता रहा है। दूसरी ओर, सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर सदस्य देशों के बीच सुधार के स्वरूप और प्रक्रिया पर मतभेद बने हुए हैं। ब्रिटेन ने भी माना है कि सुधार के मॉडल पर सहमति बनाना कठिन है और इसके लिए व्यापक समझौते की आवश्यकता होगी।

भारत के समर्थन के तर्क और विरोध की राजनीति-

भारत की दावेदारी उसके विशाल जनसंख्या आधार, वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ती भूमिका, बहुपक्षीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में योगदान के आधार पर रखी जाती है। ऐसे में भारत को स्थायी सदस्यता से बाहर रखने की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

सुरक्षा परिषद में सुधार का मुद्दा केवल भारत की सीट तक सीमित नहीं है। यह इस व्यापक प्रश्न से जुड़ा है कि क्या 21वीं सदी की वैश्विक वास्तविकताओं को 20वीं सदी की शक्ति-संरचना के आधार पर चलाया जा सकता है। भारत की स्थायी सदस्यता की मांग इसी प्रतिनिधित्व और वैश्विक संस्थाओं की प्रासंगिकता से जुड़ी बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैl

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