दीनदयाल जयंती पर श्रद्धांजलि के बीच खोंगापानी की प्रतिमा बनी सवाल
छत्तीसगढ़ – 25 सितंबर को पूरा छत्तीसगढ़ पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती मनाता रहा। कहीं माल्यार्पण हुआ, कहीं भाषण, कहीं अंत्योदय और एकात्म मानववाद के सिद्धांतों का बखान। लेकिन छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिले के खोंगापानी नगर पंचायत में भाजपा के पितृ पुरुष की प्रतिमा शायद इन भाषणों से कहीं दूर अपनी बदहाली पर सवाल पूछती रही।
बताया जाता है कि 5 जनवरी 2025 को लोकार्पित हुई यह प्रतिमा दीपावली के आसपास साजिश के तहत किये गए विस्फोट से क्षतिग्रस्त हुई थी और उसके बाद उसे कपड़े में लपेट दिया गया। अब सवाल यह है कि कपड़े की वह गांठ आखिर खुलेगी कब? प्रतिमा को किसने नुकसान पहुंचाया, घटना के पीछे कौन था, आर्डर मे भ्रस्टाचार व निर्माण में गुणवत्ता से जुड़े सवाल कितने सही हैं और जिम्मेदार अधिकारियों या जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही क्या है—इन सवालों के जवाब आज भी जनता तलाश रही है।

विडंबना देखिए—जिस विचारधारा में ‘अंत्योदय’ यानी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की बात होती है, उसी विचारधारा के पितृ पुरुष की प्रतिमा ही जैसे व्यवस्था की अंतिम पंक्ति में पहुंचा दी गई हो।
भाजपा सरकार और संगठन के लिए इससे बड़ा राजनीतिक व्यंग्य शायद ही कोई हो सकता है। मंचों पर दीनदयाल जी के विचारों पर पुष्पवर्षा और खोंगापानी में उनकी प्रतिमा पर कपड़े का पहरा!


जयंती आई, नेता आए, श्रद्धांजलियां हुईं, तस्वीरें खिंचीं और सोशल मीडिया पर संदेश भी चले। लेकिन प्रतिमा की गांठ जस की तस रही। सवाल यह भी है कि जिस संगठन के एमसीबी कार्यालय में पं. दीनदयाल उपाध्याय को श्रद्धांजलि देने के कार्यक्रम नियमित रूप से होते हैं, क्या उसकी नजर खोंगापानी की इस प्रतिमा तक नहीं पहुंचती?
अब जनता पूछ रही है—दीनदयाल जी के नाम पर भाषण कब तक और उनकी प्रतिमा का उद्धार कब?
कहीं ऐसा तो नहीं कि सत्ता और संगठन के बीच दीनदयाल जी की प्रतिमा भी ‘फाइलों के अंत्योदय’ का इंतजार कर रही है?





