जियो के खराब नेटवर्क पर उपभोक्ता फोरम की बड़ी चोट
सेवा में कमी साबित, उपभोक्ता को 14 हजार रुपये देने का आदेश; कोरिया बैकुंठपुर के कानून के छात्र अभिनव पांडेय की शिकायत बनी मिसाल
छत्तीसगढ़ – मोबाइल नेटवर्क को लेकर उपभोक्ताओं की बढ़ती परेशानियों के बीच जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, कोरिया बैकुंठपुर का फैसला बड़ी नजीर बनकर सामने आया है। ग्राम सलका निवासी कानून के छात्र अभिनव पांडेय की शिकायत पर आयोग ने रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड को सेवा में कमी का जिम्मेदार मानते हुए कुल 14 हजार रुपये क्षतिपूर्ति एवं वाद व्यय के रूप में देने का आदेश दिया है। 7 अक्टूबर 2026 को सुनाए गए इस फैसले ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि उपभोक्ता से पूरा पैसा लेने के बाद गुणवत्तापूर्ण सेवा देना टेलीकॉम कंपनियों की जवाबदेही है या नहीं।
कॉल ड्रॉप से लेकर धीमे इंटरनेट तक, पढ़ाई पर पड़ा असर-

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे कोरिया के अभिनव पांडेय के लिए इंटरनेट महज मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि पढ़ाई की बुनियादी जरूरत था। उनके गांव सलका में जियो नेटवर्क की खराब स्थिति के कारण कॉल ड्रॉप, बेहद धीमी इंटरनेट स्पीड, ऑनलाइन कक्षाओं में व्यवधान और अध्ययन सामग्री डाउनलोड करने में परेशानी जैसी समस्याएं लगातार बनी रहीं।
श्री पांडेय ने समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय पहले कंपनी से समाधान की मांग की। 21 सितंबर 2023 को जियो के अपीलीय प्राधिकारी को ई-मेल शिकायत की गई। कंपनी ने अगले दिन जवाब देते हुए नेटवर्क समस्या स्वीकार की और छह महीने में सुधार का आश्वासन दिया। लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार, समय गुजरता गया और समस्या जस की तस बनी रही।
दो साल इंतजार, फिर भी नेटवर्क में नहीं आया सुधार-
जब कंपनी स्तर पर समाधान नहीं हुआ तो अभिनव पांडेय ने अक्टूबर 2025 और जनवरी 2026 में भारत सरकार के PG Portal पर भी शिकायत दर्ज कराई। मामले में कंपनी के जवाबों को लेकर भी सवाल उठे। एक शिकायत में क्षेत्र में “Optimal Coverage” बताया गया, जबकि दूसरी शिकायत में उसी क्षेत्र को “Limited Coverage” वाला बताया गया।
सबसे ज्यादा नाराजगी उस स्थिति से हुई जब समाधान देने के बजाय उपभोक्ता को कथित तौर पर नंबर किसी अन्य कंपनी में पोर्ट कराने का सुझाव दिया गया। इसके बाद श्री पांडेय ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
“लाभ कमाना है” वाली दलील पर आयोग ने लगाई लगाम-
मामले की सुनवाई के दौरान जियो की ओर से यह दलील दी गई कि कंपनी जनसेवा के लिए नहीं, बल्कि व्यवसाय और लाभ कमाने के उद्देश्य से काम करती है। कंपनी ने यह भी कहा कि संबंधित गांव में उसका अपना टावर नहीं है और उपभोक्ता द्वारा लगातार रिचार्ज कराए जाने से यह माना जा सकता है कि वह सेवा से संतुष्ट था।
आयोग ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने माना कि इंटरनेट सेवा प्रदाता के रूप में उपभोक्ता को उचित सेवा उपलब्ध कराना कंपनी की जिम्मेदारी है। समस्या का समाधान करने के बजाय ग्राहक को दूसरी कंपनी में जाने की सलाह देना भी सेवा में कमी के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना गया।
14 हजार रुपये की भरपाई, 60 दिन की मोहलत-
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत आयोग ने जियो को अभिनव पांडेय को 10 हजार रुपये क्षतिपूर्ति तथा 4 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में भुगतान करने का आदेश दिया है। कुल 14 हजार रुपये की राशि 60 दिनों के भीतर जमा करनी होगी। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर 10 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भी प्रावधान आदेश में किया गया है।
अभिनव बोले—यह सिर्फ मेरी नहीं, हर उपभोक्ता की लड़ाई-
कानूनी छात्र अभिनव पांडेय ने फैसले को उपभोक्ता अधिकारों की जीत बताते हुए कहा कि जब उपभोक्ता सेवाओं का पूरा भुगतान करता है तो गुणवत्तापूर्ण सेवा प्राप्त करना उसका अधिकार है। उनका कहना है कि छात्रों के लिए आज इंटरनेट शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है और कंपनियों को केवल मुनाफे के नजरिये से उपभोक्ताओं की समस्याओं को नहीं देखना चाहिए।
छत्तीसगढ़ के कोरिया से आया यह फैसला अब केवल 14 हजार रुपये के मुआवजे तक सीमित नहीं है। इसने टेलीकॉम कंपनियों की सेवा की गुणवत्ता, उपभोक्ता के प्रति जवाबदेही और शिकायतों के समाधान को लेकर एक बड़ा सवाल सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है।






