छत्तीसगढ़ मे मेडिकल शिक्षा के विस्तार को मिली रफ्तार
अंबिकापुर में 96 और मनेन्द्रगढ़ में 41 विद्यार्थियों ने लिया एमबीबीएस में दाखिला- 15 सितंबर से कक्षाएं शुरू होने की तैयारी- छत्तीसगढ़ — छत्तीसगढ़ में मेडिकल शिक्षा के लगातार हो रहे विस्तार के बीच शैक्षणिक सत्र 2026-27 में नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू होने जा रही है। सरगुजा संभाग के अंबिकापुर और मनेन्द्रगढ़ मेडिकल कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया का पहला चरण पूरा हो चुका है। पहले राउंड में अंबिकापुर में 96 और मनेन्द्रगढ़ में 41 विद्यार्थियों ने एमबीबीएस में प्रवेश लिया है। दोनों कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया अभी जारी है और शेष सीटों के लिए अगले राउंड का इंतजार है। शासन के निर्देश के अनुसार 15 सितंबर से एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
नए मेडिकल कॉलेजों से बढ़े प्रदेश में अवसर-

छत्तीसगढ़ में इस साल चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा विस्तार हुआ है। प्रदेश में नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी मिलने के साथ एमबीबीएस की सीटों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कवर्धा, जांजगीर-चांपा, मनेन्द्रगढ़, कुनकुरी और गीदम में 50-50 सीटों वाले सरकारी मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी मिली है। इससे नए सरकारी कॉलेजों में ही 250 एमबीबीएस सीटों का इजाफा हुआ है।
इस विस्तार का सीधा फायदा प्रदेश के विद्यार्थियों को मिलेगा। खासकर सरगुजा, उत्तर छत्तीसगढ़, जशपुर, कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर और आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए मेडिकल शिक्षा के नए विकल्प उपलब्ध हुए हैं।

अंबिकापुर में 125 सीटें, 96 पर प्रवेश-
छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की कुल 125 सीटें हैं। इनमें 104 राज्य कोटे, 18 ऑल इंडिया कोटे और 3 सेंट्रल कोटे की सीटें शामिल हैं। पहले चरण में राज्य कोटे की 96 सीटों पर विद्यार्थियों ने प्रवेश ले लिया है।
कॉलेज प्रबंधन को उम्मीद है कि अपग्रेडेशन और आगामी काउंसलिंग राउंड के बाद शेष सीटें भी भर जाएंगी। हालांकि अपग्रेडेशन के दौरान कुछ विद्यार्थी बेहतर विकल्प मिलने पर दूसरे मेडिकल कॉलेजों में जा सकते हैं। ऐसी स्थिति में खाली होने वाली सीटों को अगले राउंड में भरा जाएगा।
मनेन्द्रगढ़ में पहली बार शुरू होगी एमबीबीएस पढ़ाई-
मनेन्द्रगढ़ मेडिकल कॉलेज के लिए यह सत्र विशेष महत्व रखता है। मान्यता मिलने के बाद इस वर्ष पहली बार यहां एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू होने जा रही है।
कॉलेज में कुल 50 एमबीबीएस सीटें हैं। इनमें 42 राज्य कोटे, 7 ऑल इंडिया और एक सेंट्रल कोटे की सीट है। पहले राउंड में राज्य कोटे की 41 सीटों पर प्रवेश हो चुका है। शेष सीटों के लिए अगले राउंड की प्रक्रिया का इंतजार है।
अपना भवन तैयार होने तक अन्य भवन में लगेंगी कक्षाएं-
मनेन्द्रगढ़ मेडिकल कॉलेज की सबसे बड़ी चुनौती फिलहाल उसका स्थायी भवन है। कॉलेज और अस्पताल का निर्माण कार्य जारी है। ऐसे में शुरुआती दौर में अन्य भवन में एमबीबीएस की कक्षाएं संचालित करने की तैयारी की जा रही है।
एनएमसी के मानकों के अनुरूप 220 बिस्तरों वाले जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज से संबद्ध किया गया है। मनेन्द्रगढ़ शहर से लगभग 6 किलोमीटर दूर परसगढ़ी में करीब 35 करोड़ रुपए की लागत से मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का निर्माण कराया जा रहा है।
15 सितंबर से कक्षाएं शुरू करने की तैयारी –
शासन ने मेडिकल कॉलेजों में 15 सितंबर से एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए कम से कम 50 प्रतिशत प्रवेश पूरा होने की शर्त को आधार बनाया गया है। अंबिकापुर और मनेन्द्रगढ़ दोनों कॉलेजों में पहले राउंड में 50 प्रतिशत से अधिक सीटों पर प्रवेश हो चुका है। ऐसे में दोनों संस्थानों में निर्धारित समय से पढ़ाई शुरू करने की तैयारी है।
प्रदेश में एक साल में बढ़ीं सैकड़ों एमबीबीएस सीटें –
छत्तीसगढ़ में मेडिकल शिक्षा के विस्तार की तस्वीर इससे भी बड़ी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में पिछले एक साल में एमबीबीएस सीटों में करीब 595 सीटों की वृद्धि हुई है और सरकारी तथा निजी क्षेत्र में नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी मिली है। बाद में सीटों में और वृद्धि के साथ प्रदेश में एमबीबीएस की कुल सीटें 3025 तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
इस विस्तार से रायपुर, बिलासपुर और जगदलपुर जैसे पारंपरिक मेडिकल शिक्षा केंद्रों पर निर्भरता कम होगी और संभागीय स्तर पर विद्यार्थियों को मेडिकल शिक्षा का विकल्प मिलेगा।
सीटें बढ़ीं, अब गुणवत्ता बनाए रखना बड़ी चुनौती-
छत्तीसगढ़ मे मेडिकल कॉलेजों की संख्या और एमबीबीएस सीटें बढ़ने के साथ अब सबसे बड़ी चुनौती फैकल्टी, अस्पताल की सुविधाएं, उपकरण और क्लीनिकल प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखना होगी। नए मेडिकल कॉलेजों में पर्याप्त प्रोफेसर और अन्य शिक्षकीय स्टाफ की नियुक्ति को लेकर भी शासन स्तर पर प्रक्रिया तेज की गई है। मनेन्द्रगढ़ समेत नए कॉलेजों में संविदा आधार पर चिकित्सकीय फैकल्टी की नियुक्तियां की गई हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार केवल सीटें बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण मेडिकल शिक्षा देने के लिए पर्याप्त संख्या में विशेषज्ञ शिक्षक, आधुनिक लैब, पुस्तकालय, हॉस्टल, क्लीनिकल केस और अस्पताल की पर्याप्त सुविधाएं जरूरी होंगी।
ग्रामीण और आदिवासी अंचलों को मिलेगा दीर्घकालीन लाभ –
नए मेडिकल कॉलेजों का सबसे बड़ा असर प्रदेश के दूरस्थ और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है। अब स्थानीय विद्यार्थियों को एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई या प्रदेश से बाहर जाने की जरूरत अपेक्षाकृत कम होगी। इससे विद्यार्थियों का समय और खर्च दोनों बचेंगे।
इसके साथ ही आने वाले वर्षों में इन्हीं संस्थानों से प्रशिक्षित डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ने से दूरस्थ क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। जांजगीर-चांपा जैसे जिलों में भी 50 सीटों वाले नए सरकारी मेडिकल कॉलेज को 2026-27 सत्र से शुरू करने की मंजूरी इसी व्यापक विस्तार का हिस्सा है।
प्रदेश के लिए मेडिकल शिक्षा में नया चरण –
अंबिकापुर में 96 और मनेन्द्रगढ़ में 41 विद्यार्थियों का प्रवेश केवल दो कॉलेजों की प्रवेश प्रक्रिया नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में मेडिकल शिक्षा के तेजी से विकेंद्रीकरण का संकेत है। एक ओर नए जिलों में मेडिकल कॉलेज खुल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुराने कॉलेजों में सीटों का विस्तार किया जा रहा है। अब सरकार और मेडिकल शिक्षा विभाग के सामने इन संस्थानों को मजबूत बुनियादी ढांचे, पर्याप्त फैकल्टी और बेहतर अस्पताल सुविधाओं के साथ विकसित करने की चुनौती है।
जानकारों का कहना है कि अगर यह विस्तार गुणवत्ता के साथ आगे बढ़ता है तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को न केवल बड़ी संख्या में नए डॉक्टर मिलेंगे, बल्कि संभागीय और जिला स्तर पर विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं का नेटवर्क भी मजबूत हो सकता है।





