बस्तर बना समंदर! 20 साल बाद ऐसी तबाही, गांव बने टापू और शहर डूबा—लोग बोले, आखिर हमारी सुध कौन लेगा?
अर्नव के असर और ओडिशा से आए जल सैलाब ने बिगाड़े हालात, इंद्रावती समेत नदी-नाले खतरे के निशान के ऊपर; सैकड़ों गांव पानी से घिरे, फसलें बर्बाद, जगदलपुर के कई वार्ड जलमग्न
जगदलपुर- छत्तीसगढ़ के बस्तर ने शायद दो दशक बाद ऐसा जल प्रलय देखा है, जिसकी तस्वीरें देखकर रोंगटे खड़े हो जाएं। चारों तरफ पानी, डूबे रास्ते, घरों में घुसता सैलाब और जिंदगी बचाने के लिए छतों पर बैठे लोग… कभी हरियाली और जंगलों के लिए पहचाने जाने वाला बस्तर इन दिनों पानी के समंदर में तब्दील नजर आ रहा है। चक्रवाती तूफान ‘अर्नव’ के असर से हुई लगातार भारी बारिश और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से आई पानी की तेज आवक ने हालात को और भयावह बना दिया है। ओडिशा के जलाशयों से पानी छोड़े जाने के बाद बस्तर में बाढ़ का संकट और गहरा गया।

बस्तर जिले के दर्जनों गांवों का संपर्क मुख्यालय से कट गया है। कई गांव चारों तरफ पानी से घिरकर टापू में बदल गए हैं। वहीं संभाग में 300 से अधिक गांवों के बाढ़ से घिरने की जानकारी सामने आ रही है। नगरनार क्षेत्र के बेलगांव और भेजापदर जैसे इलाकों में ग्रामीणों को घरों की छतों पर शरण लेनी पड़ी। प्रशासन और बचाव दलों ने कई स्थानों से लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया है।
जगदलपुर में पानी-पानी, वार्डों में बढ़ी मुश्किल-
जगदलपुर शहर के निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। घरों में पानी घुसने से सामान बचाने की जद्दोजहद है तो दूसरी ओर बिजली, सड़क और जरूरी सुविधाओं को लेकर लोग परेशान हैं। शहर के कई वार्ड बाढ़ की चपेट में आए हैं। जगदलपुर से बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा की ओर जाने वाले मार्गों पर भी बाढ़ का असर पड़ा है। सड़क और रेल यातायात बाधित होने से आवागमन पर गंभीर असर पड़ा है जगदलपुर एयरपोर्ट पर भी पानी भरने की स्थिति ने लोगों की चिंता बढ़ा दी। बारिश और जलभराव ने बस्तर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।

किसान की आंखों के सामने डूब गई मेहनत-
सबसे बड़ी मार किसानों पर पड़ी है। खेतों में खड़ी फसल पानी में डूब गई। महीनों की मेहनत और उम्मीद देखते ही देखते सैलाब में समाती नजर आई। ग्रामीणों के सामने अब सिर्फ घर और जान बचाने की चुनौती नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में रोजी-रोटी का संकट भी खड़ा हो गया है।
ओडिशा से आया पानी बना बड़ी चिंता-
बताते है कि स्थानीय स्तर पर लगातार बारिश के साथ ओडिशा के जलाशयों से छोड़े गए पानी की वजह से बस्तर की नदियों में जलस्तर तेजी से बढ़ा। इंद्रावती और शबरी समेत कई नदियां और नदी-नाले उफान पर रहे। इससे पहले से बारिश से जूझ रहे इलाकों में संकट और बढ़ गया।
लोगों का सवाल—पहले से तैयारी क्यों नहीं?
बाढ़ में फंसे लोगों के लिए राहत और बचाव अभियान चल रहा है, राहत शिविर भी बनाए गए हैं। लेकिन प्रभावित इलाकों में परेशान लोगों की पीड़ा के बीच अब शासन-प्रशासन की तैयारियों पर सवाल भी उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि हर साल बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर का खतरा सामने आता है, फिर भी कई संवेदनशील इलाकों में समय रहते पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए जाते?
बस्तर में इस वक्त सवाल सिर्फ पानी उतरने का नहीं है। सवाल यह भी है कि पानी उतरने के बाद जिन घरों में लौटने को छत नहीं होगी, जिन खेतों में फसल नहीं बचेगी और जिन रास्तों पर आवागमन नहीं होगा, उन परिवारों की जिंदगी फिर पटरी पर कैसे लौटेगी?
फिलहाल राहत और बचाव कार्य जारी है, लेकिन बस्तर की जनता की आंखों में एक ही उम्मीद है—सैलाब जल्द उतरे और शासन की मदद उनके दरवाजे तक पहुंचे।






