हाथियों में भी होता है गहरा पारिवारिक जुड़ाव

छत्तीसगढ़ – वन्यजीव व्यवहार के अध्ययनों में सामने आया है कि हाथी अपने बीमार या मृत साथी के पास पहुंचकर सूंड से छूते हैं, उसे उठाने का प्रयास करते हैं और कई बार लंबे समय तक उसके आसपास ठहरते हैं। वैज्ञानिक इसे मृत्यु के प्रति संवेदनशीलता और शोक-सदृश व्यवहार के संकेत के रूप में देखते हैं। हालांकि, हाथियों की मनःस्थिति को मनुष्य के दुख या गुस्से के समान मानना अभी वैज्ञानिक रूप से निश्चित नहीं है।

हाथियों की पारिवारिक संरचना भी बेहद रोचक है। झुंड में मादा हाथियों और बच्चों के बीच मजबूत सामाजिक संबंध होते हैं। बड़े हाथी छोटे शावकों की सुरक्षा, देखभाल और मार्गदर्शन में भूमिका निभाते हैं। ऐसे में किसी शावक की मृत्यु झुंड के व्यवहार को प्रभावित कर सकती है।

हाथियों को शांत करना क्यों चुनौतीपूर्ण?

विशेषज्ञों के अनुसार, हाथियों को शांत करने का अर्थ उन्हें डराकर भगाना नहीं, बल्कि उनकी गतिविधियों और व्यवहार को समझते हुए सुरक्षित दूरी बनाए रखना है। वन विभाग द्वारा प्रशिक्षित टीमों के माध्यम से झुंड की दिशा पर नजर रखना, ग्रामीणों को सतर्क करना, भीड़ और शोर से बचना तथा सुरक्षित गलियारे उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। हाथियों को घेरना, पत्थर मारना या उनके करीब जाकर फोटो लेना जानलेवा साबित हो सकता है।

छत्तीसगढ़ के सरगुजा उदयपुर में 26 हाथियों की मौजूदगी केवल मानव-हाथी संघर्ष की चुनौती नहीं, बल्कि वन्यजीवों के प्रति हमारी जिम्मेदारी का भी सवाल है। शावक की मौत के बाद झुंड के उत्पात को केवल बदले की भावना कहना वैज्ञानिक दृष्टि से उचित नहीं होगा, लेकिन हाथियों के गहरे सामाजिक और भावनात्मक व्यवहार को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता।

सवाल यही है कि जंगल के इन संवेदनशील जीवों और इंसानी बस्तियों के बीच ऐसा संतुलन कैसे बने, जिसमें न ग्रामीणों की जान-माल को खतरा हो और न किसी बेजुबान परिवार को अपनी जान गंवानी पड़े।

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