अयोध्या राम मंदिर में पुजारियों की पोशाक बदली, अब पहनेंगे बिना सिले पीतांबरी वस्त्र
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला की सेवा और पूजा करने वाले अर्चकों की वेशभूषा में बड़ा बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था के तहत पुजारियों को अब सिले हुए चौबंदी जैसे वस्त्रों की जगह बिना सिली हुई पीले रंग की धोती और पीतांबरी उत्तरीय धारण करना होगा।नई व्यवस्था में रामलला के अर्चकों के लिए:
पीले रंग की बिना सिली धोती

पीतांबरी उत्तरीय/अंगवस्त्र


पूजा के दौरान पारंपरिक और बिना सिले वस्त्र निर्धारित किए गए हैं। गर्मी के मौसम में धोती और उत्तरीय रखा गया है, जबकि मौसम बदलने पर उपयुक्त ऊनी वस्त्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था बताई गई है।
इससे पहले पुजारियों के लिए पीले रंग की चौबंदी, धोती और पगड़ी वाली वेशभूषा निर्धारित थी। चौबंदी एक सिला हुआ कुर्तानुमा वस्त्र है। अब इसी सिले हुए ऊपरी वस्त्र को हटाकर पारंपरिक बिना सिले वस्त्रों को प्राथमिकता दी जा रही है।
ड्रेस कोड क्यों बदला गया?
धार्मिक न्यास समिति से जुड़े संतों का मत है कि गर्भगृह में भगवान की सेवा और पूजा के दौरान वैष्णव परंपरा और धार्मिक शुचिता के अनुरूप बिना सिले वस्त्र अधिक उपयुक्त हैं। इसी आधार पर नई वेशभूषा तय की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक समिति के सदस्यों ने सिले हुए चौबंदी वाले परिधान पर पुनर्विचार किया था।
13 अगस्त से लागू होने की वजह
रिपोर्ट के अनुसार अर्चकों की ड्यूटी का रोस्टर अमावस्या और पूर्णिमा के आसपास बदलता है। सावन शुक्ल प्रतिपदा से ड्यूटी की पालियों में बदलाव के साथ नई पोशाक व्यवस्था लागू करने की बात कही गई है।
श्रद्धालुओं के लिए कोई नया ड्रेस कोड?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह बदलाव रामलला की पूजा करने वाले अर्चकों की वेशभूषा से संबंधित है। श्रद्धालुओं के लिए इसी फैसले के तहत कोई नया अनिवार्य ड्रेस कोड घोषित होने की जानकारी नहीं है।





