रूसी तेल से टकराया ट्रंप का टैरिफ हथियार- भारत-चीन-रूस समीकरण ने बदली विश्व राजनीति
नई दिल्ली – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए नया आर्थिक हथियार तैयार कर लिया है। 18 सितंबर को उन्होंने रूस और ईरान से संबंधित नए प्रतिबंध कानून पर हस्ताक्षर कर दिए, जिसके तहत रूस से बड़े पैमाने पर तेल-गैस खरीदने वाले देशों के अमेरिकी निर्यात पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को मिला है। भारत और चीन इस प्रावधान की जद में आने वाले प्रमुख देश हैं। हालांकि, भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ अभी स्वतः लागू नहीं हुआ है।
अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि भारत के लिए यह फैसला इसलिए गंभीर है क्योंकि देश अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 88 प्रतिशत से अधिक आयात करता है और रूसी तेल उसकी आयातित जरूरत का करीब आधा हिस्सा रहा है। यदि अमेरिका वास्तव में 100 प्रतिशत टैरिफ लागू करता है तो भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा कठिन हो सकती है, व्यापारिक रिश्तों पर दबाव बढ़ सकता है और पहले से चल रही भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता प्रभावित हो सकती है।

लेकिन इस टकराव का दूसरा पहलू भी है। भारत, रूस और चीन के बीच बढ़ता आर्थिक और रणनीतिक संपर्क अमेरिकी दबाव की सीमाओं को उजागर करता है।पता हो चीन और भारत रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदार हैं और मॉस्को के लिए एशियाई बाजार महत्वपूर्ण आर्थिक सहारा बन चुके हैं। ऐसे में अमेरिका का एकतरफा दबाव केवल रूस को नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अमेरिकी कंपनियों तथा उपभोक्ताओं को भी प्रभावित कर सकता है।
सूत्रों के अनुसार ट्रंप की टैरिफ नीति अमेरिका की सौदेबाजी की ताकत बढ़ाने का प्रयास मानी जा सकती है, लेकिन लगातार शुल्क और प्रतिबंधों का इस्तेमाल सहयोगी तथा साझेदार देशों के साथ विश्वास की समस्या भी पैदा कर रहा है। वहीं भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी ऊर्जा और व्यापारिक सुरक्षा की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।

जानकार कहते है कि दुनिया अब एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है जहां अमेरिकी दबाव के समानांतर भारत, चीन और रूस अपने आर्थिक हितों के नए रास्ते तलाश रहे हैं। यह जरूरी नहीं कि तीनों देश औपचारिक गठबंधन बन जाएं, लेकिन बदलते व्यापार और ऊर्जा समीकरण यह संकेत जरूर दे रहे हैं कि विश्व व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक बहुध्रुवीय हो रही है। जिससे अमेरिका की चुनौती अब यही है कि टैरिफ की ताकत को इस्तेमाल करते हुए वह अपने साझेदारों के साथ विश्वास और सहयोग का संतुलन कैसे बनाए रखता है l





