युद्ध के बीच मोदी का कूटनीतिक कमाल -11 देशों ने दिखाया BRICS का दम- 45 पेज, 140 बिंदुओं का ऐतिहासिक घोषणा-पत्र
नई दिल्ली –
दुनिया जब युद्ध, तनाव, प्रतिबंधों और व्यापारिक टकराव के दौर से गुजर रही है, तब नई दिल्ली से निकली BRICS की आवाज ने वैश्विक कूटनीति में भारत की भूमिका को नई ऊंचाई दी है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 11 देशों ने 45 पेज और 140 बिंदुओं वाले नई दिल्ली घोषणा-पत्र को सर्वसम्मति से मंजूर कर यह संदेश दिया कि मतभेदों के बावजूद संवाद और सहमति की जमीन तैयार की जा सकती है।
ब्रिक्स के जानकर कहते है सबसे बड़ी चुनौती पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और बढ़ते तनाव के बीच सहमति बनाना था। BRICS में ईरान भी है और संयुक्त अरब अमीरात भी, जिसके अमेरिका से करीबी संबंध हैं। इसके बावजूद सदस्य देशों ने मध्य पूर्व में बढ़ती हिंसा पर गंभीर चिंता जताते हुए अधिकतम संयम, नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा तथा बातचीत और कूटनीति के जरिए विवादों के समाधान का आह्वान किया।

Brics घोषणा-पत्र केवल युद्ध तक सीमित नहीं रहा। इसमें एकतरफा प्रतिबंधों और टैरिफ की आलोचना, वैश्विक व्यापार में निष्पक्षता, आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख, ऊर्जा सहयोग और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दे भी प्रमुख रहे। मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समेत अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
यही इस सम्मेलन की सबसे बड़ी सार्थकता है। BRICS अब केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ की सामूहिक आवाज बनने की दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है। भारत ने यह साबित किया है कि अमेरिका-ईरान तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और चीन-पश्चिम टकराव जैसे कठिन दौर में भी संवाद की मेज पर अलग-अलग ध्रुवों को साथ बैठाया जा सकता है।

कहा जा सकता है कि Brics मे सामने आया 45 पेज का दस्तावेज सिर्फ कागज नहीं, बल्कि बदलती विश्व व्यवस्था में भारत की बढ़ती कूटनीतिक पकड़ का दस्तावेज बनकर सामने आया है।





