साबुन-शैंपू से टूथपेस्ट तक अब पैकिंग बताएगी ‘वेज’ या ‘नॉनवेज
केंद्र सरकार का बड़ा उपभोक्ता हितैषी फैसला- पैकेजिंग पर रंगीन निशान से मिलेगी सामग्री के स्रोत की जानकारी
नई दिल्ली- उपभोक्ताओं को रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले उत्पादों की प्रकृति के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, कॉस्मेटिक्स और अन्य टॉयलेटरीज की पैकेजिंग पर उत्पाद के शाकाहारी या गैर-शाकाहारी मूल को दर्शाने वाला रंगीन निशान अनिवार्य किया है।

पैकेट पर नजर डालते ही मिलेगी जानकारी-
नए प्रावधान के तहत शाकाहारी मूल वाले उत्पाद पर हरा बिंदु, जबकि गैर-शाकाहारी मूल वाले उत्पाद पर लाल या भूरा बिंदु प्रदर्शित किया जाएगा। यह निशान पैकेज के प्रमुख डिस्प्ले पैनल पर निर्धारित तरीके से दिखाई देगा। इससे उपभोक्ता को खरीदारी के समय उत्पाद की प्रकृति समझने में आसानी होगी।

सरकार की मंशा—उपभोक्ता को मिले स्पष्ट विकल्प-
केंद्र सरकार की इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ता को उत्पाद में प्रयुक्त सामग्री के स्रोत की जानकारी देकर सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाना है। व्यक्तिगत देखभाल से जुड़े कई उत्पादों में पौधों, खनिजों, सिंथेटिक अथवा पशु-आधारित स्रोतों से प्राप्त सामग्री का इस्तेमाल हो सकता है। ऐसे में पैकेजिंग पर स्पष्ट संकेत उपभोक्ताओं के लिए उपयोगी होगा।
पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर-
सरकार के इस कदम से उत्पादों की लेबलिंग में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। खासतौर पर वे उपभोक्ता, जो पशु-आधारित सामग्री वाले उत्पादों से बचना चाहते हैं, खरीदारी के समय इस संकेत के माध्यम से आसानी से अपनी पसंद का उत्पाद चुन सकेंगे।
सामने आई सूचनाओ के अनुसार यह व्यवस्था उपभोक्ता अधिकारों और जानकारी के आधार पर खरीदारी के विकल्प को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।





