आयुर्वेद दिवस पर एमसीबी में गूंजा स्वस्थ जीवन का संदेश

800 से अधिक लोगों ने आयुष स्वास्थ्य शिविर का लिया लाभ, योग, संतुलित आहार और प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने की दी सीख
छत्तीसगढ़ – आयुर्वेद दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिला मुख्यालय मनेन्द्रगढ़ में आयोजित आयुष स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम एवं विशाल स्वास्थ्य शिविर ने लोगों को निरोगी जीवन के लिए अपनी दिनचर्या और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाने का संदेश दिया। “सेवा संकल्प अभियान” के तहत आयोजित शिविर में 800 से अधिक लोगों ने आयुर्वेद एवं होम्योपैथी चिकित्सा सेवाओं, स्वास्थ्य परामर्श तथा जागरूकता गतिविधियों का लाभ उठाया। इस वर्ष आयुर्वेद दिवस की थीम “आयुर्वेद फॉर ए हेल्दी टुमॉरो” यानी “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” रही।

कार्यक्रम का शुभारंभ नगर पालिका परिषद मनेन्द्रगढ़ की अध्यक्ष श्रीमती प्रतिमा यादव सहित जनप्रतिनिधियों ने भगवान धन्वंतरि के छायाचित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन और समृद्ध चिकित्सा परंपरा है, जो उपचार के साथ स्वस्थ जीवन जीने की समग्र दृष्टि प्रदान करती है। आयुर्वेद का मूल उद्देश्य रोग होने के बाद उपचार तक सीमित न रहकर स्वास्थ्य की रक्षा और जीवनशैली में संतुलन बनाए रखना भी है।

पता हो आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव, अनियमित दिनचर्या, असंतुलित खान-पान और शारीरिक गतिविधियों की कमी स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन रही है। ऐसे समय में योग, ध्यान, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और सकारात्मक सोच जैसी आदतों का महत्व और बढ़ जाता है। शिविर में नागरिकों को इन्हीं सरल उपायों को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया गया।

शिविर में आयुर्वेद एवं होम्योपैथी चिकित्सकों ने लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सुनीं, आवश्यक परामर्श दिया तथा जरूरत के अनुसार निःशुल्क औषधियों का वितरण किया। साथ ही नागरिकों को रोगों से बचाव, स्वास्थ्य संरक्षण और अपनी शारीरिक आवश्यकताओं के अनुरूप दिनचर्या अपनाने की जानकारी दी गई।

रसोई घर से स्वास्थ्य का संदेश-

शिविर में “रसोई घर से स्वास्थ्य” की अवधारणा विशेष आकर्षण का केंद्र रही। लोगों को बताया गया कि स्वस्थ जीवन के लिए हमेशा महंगे संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती। घर की रसोई में उपलब्ध मौसमी एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थों का संतुलित उपयोग, सही समय पर भोजन और उचित खान-पान की आदतें स्वास्थ्य संरक्षण में उपयोगी हो सकती हैं।

नागरिकों को अपनी आयुर्वेदिक प्रकृति के अनुरूप आहार-विहार में संतुलन रखने के प्रति भी जागरूक किया गया। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि आयुर्वेदिक औषधियों सहित किसी भी चिकित्सा पद्धति का उपयोग चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार किया जाना चाहिए।

तनाव भरे दौर में योग और आयुष का महत्व-

विषय विशेषज्ञयों ने वर्तमान समय में मानसिक तनाव और भागदौड़ भरी जीवनशैली के बीच योग और ध्यान को दैनिक जीवन में शामिल करने पर विशेष जोर दिया गया। बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों को अपनी क्षमता एवं आवश्यकता के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि करने और पर्याप्त विश्राम लेने का संदेश दिया गया।

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