शाबाश केवरी! सरकारी नशामुक्ति अभियान को ग्राम पंचायत ने दिखाया आईना
शराबबंदी के संकल्प को जमीन पर उतारकर केवरी ने पेश की मिसाल, नियम तोड़ने वालों पर भी कसा शिकंजा
छत्तीसगढ़ – नशामुक्त समाज का सपना केवल सरकारी अभियानों, बैठकों और बड़े बजट से पूरा नहीं होगा, बल्कि इसके लिए समाज की सामूहिक इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प भी जरूरी है। सरगुजा जिले के लखनपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत केवरी ने इसी सोच को जमीन पर उतारकर सरकारी नशामुक्ति अभियानों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
बताया जाता है कि पिछले तीन वर्षों में छत्तीसगढ़ शासन ने नशामुक्ति अभियान पर करीब 1600 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन नशे के खिलाफ जमीनी बदलाव को लेकर अब भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे माहौल में केवरी गांव का प्रयास यह दिखाता है कि जब पंचायत, महिलाएं और ग्रामीण एकजुट होकर निर्णय लेते हैं तो सीमित संसाधनों में भी प्रभावी परिणाम सामने आ सकते हैं।

ग्राम पंचायत ने 1 सितंबर से गांव में पूर्ण शराबबंदी लागू करने का निर्णय लिया। खास बात यह है कि यह फैसला केवल कागजों तक सीमित नहीं रहा। पंचायत की निगरानी में बाहर से शराब पीकर गांव लौटने वालों पर कार्रवाई शुरू की गई। अब तक 16 लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 45 हजार रुपये से अधिक का आर्थिक जुर्माना वसूले जाने की जानकारी सामने आई है।
केवरी की महिलाओं और ग्रामीणों ने नशामुक्त गांव का संकल्प लेकर यह संदेश दिया है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है।

सरकारी योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद यदि अपेक्षित सामाजिक बदलाव नजर नहीं आता, तो केवरी जैसे छोटे गांवों का मॉडल सरकार के लिए आईना जरूर है। शाबाश केवरी—आपने बता दिया कि नशामुक्ति केवल अभियान नहीं, बल्कि संकल्प, अनुशासन और सामूहिक भागीदारी का नाम है





