दीपों की आभा से दिव्य हुई अयोध्या, आस्था और संस्कृति के वैश्विक उत्सव का साक्षी बनेगी रामनगरी
उत्तरप्रदेश – अयोध्या एक बार फिर दीपों की स्वर्णिम आभा से जगमगाने को तैयार है। भगवान श्रीराम की पावन जन्मभूमि पर दीपोत्सव का उल्लास केवल दीपावली का उत्सव नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति, भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के गौरव का भव्य प्रकटीकरण है। सरयू के तट से लेकर रामनगरी की सड़कों तक रोशनी की अद्भुत छटा दिखाई दे रही है। मंदिरों की सजावट, सुसज्जित घाट और दीपों से आलोकित मार्ग श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति करा रहे हैं।
इस बार दीपोत्सव में 56 घाटों पर लगभग 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने की तैयारी है। सरयू तट पर सामूहिक आरती, भव्य लेजर शो और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन को विशेष आकर्षण प्रदान करेंगे। जब लाखों दीप एक साथ प्रज्ज्वलित होंगे, तब ऐसा प्रतीत होगा मानो धरती पर स्वयं देवलोक उतर आया हो। सरयू की लहरों पर प्रतिबिंबित दीपों की आभा भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन की पावन स्मृति को जीवंत करेगी।


अयोध्या का दीपोत्सव त्रेतायुग की उस परंपरा का प्रतीक है, जब चौदह वर्ष के वनवास के बाद प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के अयोध्या लौटने पर नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। आज यही परंपरा विश्व को सत्य, धर्म, मर्यादा, त्याग और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दे रही है।
योगी सरकार के प्रयासों से दीपोत्सव को व्यापक स्वरूप मिला है। धार्मिक स्थलों के विकास, सौंदर्यीकरण, बेहतर सुविधाओं और सांस्कृतिक आयोजनों ने अयोध्या को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में योगदान दिया है। अब अयोध्या केवल भारत की धार्मिक नगरी नहीं, बल्कि विश्वभर के रामभक्तों और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन रही है।
दीपोत्सव का संदेश स्पष्ट है—जब आस्था के दीप जलते हैं, तो संस्कृति का प्रकाश सीमाओं से परे फैलता है। अयोध्या आज उसी सनातन प्रकाश से संपूर्ण विश्व को आलोकित कर रही है।





