कबाड़ कारोबारियों के बढ़ते हौसले पर सवाल, संरक्षण किसका?
रेल संपत्ति की चोरी से खुली बड़ी परत, 17 हजार की तलाश में मिला साढ़े छह लाख से अधिक का संदिग्ध कबाड़
छत्तीसगढ़ -वैसे तो छत्तीसगढ़ के ओद्योगिक शहर व कोल माइंस वाले क्षेत्र मे कबाड़ व काबड़ियों की वारदात व हमले अब aam बात होती जा रही है लेकिन राज्य के एमसीबी जिले में बेलगाम कबाड़ कारोबार को लेकर लंबे समय से उठते सवाल अब एक बार फिर गंभीर हो गए हैं। मनेंद्रगढ़ क्षेत्र में रेलवे संपत्ति की चोरी की सूचना पर आरपीएफ की कार्रवाई ने जिस तरह करीब 450 किलो रेलवे सामग्री बरामद की, उसने केवल रेल संपत्ति की सुरक्षा व्यवस्था पर ही नहीं, बल्कि शहर में खुलेआम संचालित हो रहे कबाड़ कारोबार और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

बताया जाता है कि आरपीएफ टीम ने संदिग्ध स्क्रैप से लदे एक ट्रक को पकड़ कर जब जांच की। तब कार्रवाई के दौरान करीब 450 किलो रेलवे संपत्ति बरामद हुई, जिसकी कीमत लगभग 17 हजार रुपये बताई गई। लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि ट्रक में 21 टन से अधिक कबाड़ लदा मिला, जिसकी अनुमानित कीमत साढ़े छह लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है। रेलवे संपत्ति की बरामदगी ने इस पूरे कबाड़ कारोबार की निगरानी और स्रोत को लेकर कई सवाल पैदा कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि जब्त कबाड़ का संबंध मनेंद्रगढ़ में खुलेआम कबाड़ कारोबार करने वाले एक प्रमुख कारोबारी से है। कार्रवाई के बाद संबंधित व्यक्ति के फरार होने की बात भी सामने आ रही है।

इस सबंध मे सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर शहर के बीचोंबीच कबाड़ के बड़े गोदाम और भारी मात्रा में स्क्रैप का कारोबार किसकी निगरानी में संचालित हो रहा है? यदि रेलवे की संपत्ति कबाड़ के रूप में बाजार तक पहुंच रही है तो यह काबड़ियों के बढ़ते हौसले का अपने आप मे प्रमाण कहा जा सकता है
लोगो का कहना है कि कोयला खदानों और आम नागरिकों की संपत्ति से जुड़ी चोरी की शिकायतों के बीच अब रेलवे संपत्ति की बरामदगी ने मामले को और गंभीर बना दिया है। सवाल यह भी है कि चोरी की घटनाओं पर एसईसीएल और अन्य संबंधित प्रबंधन कितनी गंभीरता से कार्रवाई करते हैं।
आरपीएफ की कार्रवाई ने भले ही एक मामले का खुलासा किया हो, लेकिन इससे बड़ा सवाल अभी भी कायम है—एमसीबी में कबाड़ कारोबारियों के हौसले आखिर क्यों व किसके संरक्षण मे बढ़ रहे हैं और इस पूरे नेटवर्क पर क्या कभी ठोस कार्रवाई भी होंगी या नहीं ?





