राशन के चावल में कीड़े और फफूंद! गरीब परिवारों के सामने भूख और सेहत के बीच संकट

शंकरगढ़ में सबसे ज्यादा शिकायतें, सरगुजा संभाग के कई जिलों में भी उठ रहे सवाल; हितग्राहियों का आरोप—शिकायतों के बावजूद जिम्मेदारों की निगरानी कमजोर
सरगुजा – जिस अनाज से गरीब परिवारों का पेट भरना चाहिए, वही अगर कीड़े और फफूंद से खराब मिले तो सवाल सिर्फ राशन की गुणवत्ता का नहीं, बल्कि पूरी वितरण व्यवस्था की जवाबदेही का बन जाता है। बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ विकासखंड में राशन दुकानों से मिलने वाले चावल को लेकर ऐसी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। सरगुजा संभाग के अन्य जिलों से भी मिलती-जुलती शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सामने मजबूरी यह है कि वे राशन लेने से इनकार भी नहीं कर सकते, लेकिन खराब चावल खाने से उन्हें स्वास्थ्य को लेकर डर बना रहता है।

बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ विकासखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले चावल की गुणवत्ता को लेकर हितग्राहियों में नाराजगी बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि कई बार राशन में कीड़े अथवा फफूंद लगे चावल मिलने की शिकायत सामने आती है। ऐसे में गरीब परिवारों के सामने दोहरी परेशानी खड़ी हो जाती है—एक तरफ सीमित आय के कारण सरकारी राशन उनकी जरूरत है, तो दूसरी तरफ खराब चावल स्वास्थ्य के लिए चिंता का कारण बन रहा है।

मामले में अधिकारियों का कहना है कि राशन दुकानों के माध्यम से वितरित किया जाने वाला चावल निर्धारित मानकों के अनुरूप होता है। यदि किसी स्तर पर शिकायत सही पाई जाती है तो जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, राशन दुकान संचालकों का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। संचालकों का कहना है कि उन्हें खाद्य आपूर्ति विभाग से जो चावल प्राप्त होता है, वही हितग्राहियों को वितरित किया जाता है। ऐसे में असली सवाल यह है कि यदि चावल वास्तव में खराब है तो वह आपूर्ति श्रृंखला के किस स्तर पर खराब हुआ और गुणवत्ता जांच में वह कैसे पास हो गया?

लंबे समय से सामने आ रही शिकायतों के बीच विभागीय निगरानी और समय पर जांच को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जरूरत है कि शिकायतों को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखकर संबंधित राशन दुकानों से चावल के नमूने लिए जाएं, उनकी गुणवत्ता की जांच कराई जाए और खराब पाए जाने पर जिम्मेदारी तय की जाए।

वैसे गरीबों का राशन उनकी मजबूरी नहीं, उनका अधिकार है। इसलिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सबसे पहली प्राथमिकता यही होनी चाहिए कि हितग्राहियों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और खाने योग्य अनाज मिले।

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