कोयला लेवी की आंच में कुमार विश्वास का कार्यक्रम, 25 लाख की फंडिंग ने गरमाई छत्तीसगढ़ की सियासत

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे राजनीतिक और सामाजिक आयोजनों तक कथित अवैध धन के इस्तेमाल के आरोपों की परतें भी खुल रही हैं। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के छठे पूरक चालान में कवि डॉ. कुमार विश्वास के खैरागढ़ कार्यक्रम के लिए 25 लाख रुपये की व्यवस्था का उल्लेख सामने आया है। जांच एजेंसी के मुताबिक इसका आधार आरोपी विधायक देवेंद्र यादव और सूर्यकांत तिवारी के बीच हुई वाट्सऐप बातचीत, जब्त डायरी और अन्य जांच सामग्री है।

मामला वर्ष 2022 के खैरागढ़ उपचुनाव के दौरान आयोजित ‘हमर भांचा राम’ कार्यक्रम से जुड़ा है। EOW के अनुसार, 5 अप्रैल की बातचीत में कार्यक्रम के लिए 25 लाख रुपये की व्यवस्था का उल्लेख है। इसके बाद नकद राशि की उपलब्धता और आवाजाही से जुड़े संदेशों का भी चालान में जिक्र किया गया है। जांच एजेंसी ने इन डिजिटल साक्ष्यों को डायरी की प्रविष्टियों और संबंधित लोगों के बयानों से जोड़कर देखा है।

यही बिंदु अब छत्तीसगढ़ की राजनीति में बड़ा सवाल बन रहा है—क्या कथित कोल लेवी से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों और सार्वजनिक आयोजनों में हुआ? मामले में नेताओं की कथित भूमिका पहले से जांच के घेरे में रही है और अदालत में पेश दस्तावेज इस बहस को और धार दे रहे हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति या आयोजन को अवैध धन से सीधे जोड़ने का अंतिम निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकलेगा।

इस प्रकरण का राजनीतिक असर आने वाले दिनों में दिखाई दे सकता है। विपक्ष इसे तत्कालीन सत्ता तंत्र और कथित लेवी नेटवर्क के संबंधों के प्रमाण के तौर पर उठा सकता है, जबकि बचाव पक्ष जांच के निष्कर्षों और साक्ष्यों की न्यायिक जांच पर जोर देगा। सबसे अहम सवाल यही रहेगा कि 25 लाख रुपये की कथित व्यवस्था का वास्तविक स्रोत क्या था और क्या जांच एजेंसी इसे कोल लेवी की रकम से निर्णायक रूप से जोड़ पाती है।

राजनैतिक नजर रखने वालों के अनुसार छत्तीसगढ़ के लिए यह मामला केवल कथित आर्थिक घोटाले का नहीं, बल्कि राजनीति, प्रशासन, चुनावी गतिविधियों और सार्वजनिक आयोजनों में धन के इस्तेमाल की पारदर्शिता का भी बड़ा सवाल बनता जा रहा है।

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