बैनर-पोस्टर से दूरी, फोटो खिंचाने वालों को सख्त संदेश! स्मृति ईरानी ने छत्तीसगढ़ भाजपा में अनुशासन की नई लकीर खींची
सादगी पर जोर, स्पष्ट निर्देश और संगठन की समीक्षा—दो दिवसीय दौरे से भाजपा में कार्यशैली बदलने के संकेत, कांग्रेस के सामने भी नई राजनीतिक चुनौती!
छत्तीसगढ़ – स्वागत के लिए न बैनर-पोस्टर का दिखावा, न नेताओं की गाड़ियों का रुतबा और न ही बिना बुलावे बैठक में मौजूदगी! छत्तीसगढ़ भाजपा की नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी के दो दिवसीय प्रवास ने पार्टी के भीतर सादगी, अनुशासन और जवाबदेही को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। उनका संदेश साफ नजर आया—संगठन में पहचान दिखावे से नहीं, काम और जिम्मेदारी से बनेगी।
रायपुर प्रवास पर स्मृति ईरानी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को सुनकर व इसके बाद प्रदेश पदाधिकारियों, संभाग एवं जिला प्रभारियों, पूर्व विधायकों-सांसदों और कोर ग्रुप के साथ संगठनात्मक बैठकों का सिलसिला आरम्भ किया । बिना आमंत्रण कार्यालय पहुंचने से बचने और केवल संबंधित बैठक के आमंत्रित सदस्यों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश भी चर्चा में रहा। मंत्रियों की गाड़ियों, सुरक्षा कर्मियों और बैठक की व्यवस्थाओं को लेकर भी सख्ती की खबरें सामने आईं।

द्वितीय दिवस विधायकों, सांसदों, मंत्रियों और निगम-मंडल-आयोगों के अध्यक्षों व उपाध्यक्षों के साथ बैठकों में संगठन और सरकार के बीच समन्वय, जिम्मेदारियों तथा आगामी रणनीति पर चर्चा केंद्र में रही। इन बैठकों को भाजपा की संगठनात्मक तैयारियों और आगामी राजनीतिक चुनौतियों की समीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष किरण देव के मुताबिक, स्मृति ईरानी की सादगी और अनुशासन का असर निचले स्तर तक पहुंचेगा। ऐसे में फोटो खिंचाने और दिखावे के बजाय जमीनी काम को प्राथमिकता देने का संदेश पार्टी के लिए अहम माना जा रहा है।
कांग्रेस के लिए क्या है सियासी संदेश? भाजपा में यदि यह कार्यशैली लगातार दिखाई देती है, तो विपक्ष के लिए सरकार और संगठन के कामकाज पर राजनीतिक मुकाबले की नई परिस्थितियां बन सकती हैं। हालांकि, कांग्रेस की रणनीति या उसे होने वाली परेशानी का वास्तविक आकलन आने वाले दिनों में ही होगा।
अब बड़ा सवाल यही है—क्या स्मृति ईरानी का यह अनुशासन छत्तीसगढ़ भाजपा की स्थायी कार्यसंस्कृति बनेगा या केवल दौरे तक सीमित रहेगा?





