नशे के अंधकार से मुक्ति की पहल: स्कूल से घर-घर तक गूंजा नशामुक्त छत्तीसगढ़ का संदेश
छत्तीसगढ़ -एमसीबी -नशे की गिरफ्त में बचपन, बिखरते परिवार और टूटते सामाजिक रिश्ते आज समाज के सामने गंभीर चुनौती बनकर खड़े हैं। ऐसे समय में नशे के खिलाफ जागरूकता की अलख जगाना केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की अनिवार्य जरूरत है। इसी उद्देश्य को लेकर शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल, पोड़ी, चिरमिरी ने नशामुक्त समाज और नशामुक्त छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में सराहनीय पहल करते हुए जागरूकता रैली निकाली और जन-जन तक नशामुक्ति का संदेश पहुंचाने का प्रयास किया।
‘नशे से दूरी, जीवन से दोस्ती’ का संदेश लेकर निकली इस पहल ने शिक्षा के मंदिर से समाज के हर घर तक जागरूकता पहुंचाने का संकल्प दोहराया। अभियान का उद्देश्य लोगों को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराने के साथ ही बच्चों और युवाओं को नशे के बढ़ते प्रभाव से बचाना तथा परिवारों को इस सामाजिक बुराई के प्रति सजग करना रहा।

वर्तमान मे चिंता का विषय यह है कि नशे का प्रभाव केवल वयस्कों तक सीमित नहीं रह गया है। किशोरों और स्कूली बच्चों तक इसकी पहुंच की आशंका समाज, अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों के लिए गंभीर चेतावनी है। ऐसे में विद्यालयों की भूमिका केवल किताबी शिक्षा देने तक सीमित नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में स्वस्थ जीवनशैली, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने की भी है।

इस महत्वपूर्ण अभियान में बेटी बचाओ मंच का भी सराहनीय सहयोग मिला। विद्यालय के प्राचार्य सत्येंद्र सिंह, डॉ. डी.के. उपाध्याय तथा बेटी बचाओ मंच के जिला अध्यक्ष मिथिलेश पाराशर व अन्य वक्ताओ ने जागरूकता संदेश के साथ अभियान में अहम भूमिका निभाई।
वास्तव मे नशामुक्त छत्तीसगढ़ का सपना तभी साकार होगा, जब विद्यालय, परिवार, समाज और प्रशासन मिलकर नशे के विरुद्ध एकजुट होंगे। जरूरत है कि बच्चों पर सकारात्मक निगरानी रखी जाए, नशे के कारोबार के विरुद्ध जागरूकता बढ़े और नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों को सहयोग व उचित उपचार मिले।
कहा जा सकता है कि यह पहल संदेश देती है कि नशामुक्त समाज केवल एक नारा नहीं, बल्कि स्वस्थ परिवारों, सुरक्षित बचपन और उज्ज्वल भविष्य के निर्माण का संकल्प है।





