त्योहार आते ही जागा खाद्य विभाग, होटलों से नमूने तो लिए, लेकिन जांच रिपोर्ट का क्या?

हजारी होटल से खोवा और पैराडाइज फूड पॉइंट से मिक्स्ड ग्रेवी मसाला का नमूना भेजा प्रयोगशाला, रिपोर्ट सार्वजनिक करने की व्यवस्था पर सवाल
छत्तीसगढ़ -एमसीबी – दीपावली का त्योहार आते ही खाद्य एवं औषधि प्रशासन की नींद खुल गई है। एमसीबी जिले के मनेन्द्रगढ़ और चिरमिरी में मिठाई दुकानों, होटलों एवं खाद्य प्रतिष्ठानों की सघन जांच शुरू कर दी गई है। विभाग की इस सक्रियता का स्वागत होना चाहिए, लेकिन सवाल यह है कि क्या खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल त्योहारों तक ही सीमित है?

एमसीबी मुख्यालय मनेन्द्रगढ़ में किए गए निरीक्षण के दौरान हजारी होटल से खोवा तथा पैराडाइज फूड पॉइंट से मिक्स्ड ग्रेवी मसाला का नमूना लेकर राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया है। विभाग ने कारोबारियों को गुणवत्ता और स्वच्छता के निर्देश भी दिए हैं।

लेकिन खाद्य विभाग की कार्रवाई पर सबसे बड़ा सवाल नमूने लेने के बाद की प्रक्रिया को लेकर है। होटलों और दुकानों से खाद्य सामग्री के नमूने तो ले लिए जाते हैं, लेकिन उनकी जांच रिपोर्ट कब आती है, उसमें क्या पाया जाता है और दोषी प्रतिष्ठानों पर क्या कार्रवाई होती है, इसकी जानकारी आम जनता तक शायद ही पहुंच पाती है। आखिर जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती? दोष प्रमाणित होने पर कार्रवाई का खुलासा क्यों नहीं होता?

चिकित्सको के अनुसार मिलावटी खोवा, दूषित मसाले और असुरक्षित खाद्य सामग्री से उल्टी-दस्त, फूड पॉइजनिंग, टाइफाइड, पीलिया, आंतों के संक्रमण तथा लंबे समय में यकृत और गुर्दे से जुड़ी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

एमसीबी जिला मे कलेक्टर सुश्री संतन देवी जांगड़े के कड़े निर्देश के बाद दीपावली पर विभाग की सक्रियता सराहनीय है, लेकिन खाद्य सुरक्षा दिखावे की मौसमी कार्रवाई नहीं, बल्कि सालभर की जिम्मेदारी है। मनेन्द्रगढ़ और चिरमिरी ही नहीं वरन जिला की जनता जानना चाहती है कि लिए गए नमूनों की रिपोर्ट कब आएगी और मिलावट मिलने पर जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी? लोगो का कहना है कि सिर्फ नमूने लेना नहीं, जांच का परिणाम बताना भी खाद्य विभाग की जवाबदेही है।

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