छत्तीसगढ़ के सरकारी कार्यालयों मे काटने लगे कनेक्शन – पैसा दो बिजली लो का नियम सख्ती से हुआ लागू
छत्तीसगढ़ के सरकारी दफ्तरों में अंधेरा -CSPDCL का बड़ा एक्शन- 3432 करोड़ से ज्यादा बकाया- वसूली के लिए कनेक्शन काटे- अब प्रीपेड से जलेगी बत्ती- पैसा दो बिजली का नियम लागू
प्रदेश मे सरकारी कनेक्शन काटे गए- खैरागढ़ नगर पालिका में टॉर्च की रोशनी में हुआ काम -बिलासपुर-रायपुर से दुर्ग तक अभियान- सरकारी दफ्तरों में लागू हुआ प्रीपेड सिस्टम
छत्तीसगढ़ —

छत्तीसगढ़ में सरकारी विभाग ही बिजली कंपनी के सबसे बड़े डिफाल्टर बन गए हैं। बकाया 3,432 करोड़ रुपये तक पहुंचने के बाद छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी ने सख्ती दिखाते हुए सीधे सरकारी कार्यालयों की बिजली काटना शुरू कर दिया है। कंपनी का दावा है कि बार-बार नोटिस के बाद भी भुगतान नहीं होने पर यह कार्रवाई जरूरी थी।
खैरागढ़ और बिलासपुर से शुरू हुआ बिजली गोल का खेल —

बताया जाता है की सबसे चर्चित कार्रवाई खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में हुई। 1 सितंबर को खैरागढ़ नगर पालिका कार्यालय का कनेक्शन 8.25 लाख रुपये बकाया पर काट दिया गया। कर्मचारी अंधेरे में मोबाइल टॉर्च की रोशनी में काम करते नजर आए। नगर पालिका के स्ट्रीट लाइट, भवन समेत कुल बकाया 3 करोड़ से ज्यादा बताया जा रहा है। और कनेक्शन जोड़ने के सवाल पर यहाँ के विद्युत कंपनी के कार्यपालन अभियंता का स्पष्ट रूप से कहना था कि “बकाया जमा होने पर ही कनेक्शन बहाल होगा।”
इसी तरह बिलासपुर, रायपुर, अंबिकापुर, दुर्ग, जगदलपुर, महासमुंद, कोरबा, रायगढ़, जांजगीर और राजनांदगांव सर्कल में कुल 10,138 सरकारी कनेक्शन मे से विद्युत कनेक्शन डिस्कनेक्ट किए जा रहे है । इन पर करीब 51 करोड़ का बकाया था। भुगतान आते ही अधिकांश कनेक्शन जोड़ने की भी खबर है कहा जाता है कि इस कार्यवाही से विद्युत मंडल ने संदेश साफ दे दिया है कि अब सरकार या सरकारी कार्यालय को कोई रियायत नहीं।
3432 करोड़ का गणित, सबसे बड़ा बकायादार कौन?-
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी की यदि माने तो
अगस्त 2024 में सरकारी बकाया 1,988 करोड़ था, जो मार्च 2025 में 2,444 करोड़ और अब 3,432 करोड़ तक पहुंच गया है। जिसमे सरकारी विभागों का बकाया इस प्रकार बताया जाता है
– नगरीय प्रशासन विभाग: 1,674 करोड़
– लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE): 111 करोड़
– लोक निर्माण विभाग: 480 करोड़
– स्वास्थ्य और जल संसाधन: 390-390 करोड़
– पुलिस विभाग: 367 करोड़
– शिक्षा विभाग: 230 करोड़
– अन्य 39 विभागों पर: 1,758 करोड़
विद्युत कंपनी अधिकारियों के अनुसार कई विभाग बजट नहीं होने का बहाना बनाते हैं, तो कई आवंटित राशि को दूसरे मद में खर्च कर देते हैं।
अब प्रीपेड सिस्टम – पहले रिचार्ज, फिर बिजली-
छत्तीसगढ़ मे विद्युत वितरण कंपनी ने
बकाये के स्थायी समाधान के लिए सरकारी कार्यालयों में प्रीपेड व्यवस्था लागू कर दी है।
वहीं विद्युत कंपनी द्वारा ब्लॉक स्तर और उससे ऊपर के सभी सरकारी कनेक्शनों पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर पंचायत स्तर तक लगाए जा रहे हैं।वहीं हर विभाग को औसत बिल के आधार पर 3 महीने का एडवांस रिचार्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है नए नियमों के अनुसार रिचार्ज खत्म – बिजली ऑटोमेटिक बंद और ऑनलाइन सिस्टम से कनेक्शन कटेगा।विद्युत कंपनी का कहना है कि पुराने बकाए के लिए ड्यूज रिकवरी एक्ट के तहत बकाया राशि को किस्तों में नियमित बिल में जोड़ा जाएगा।
बताया जाता है कि कंपनी की योजना इसे आम उपभोक्ताओं तक भी ले जाने की है। सूचनाओं के अनुसार फिलहाल हर महीने सरकारी विभागों से 550 करोड़ का भुगतान आ रहा है, लेकिन बकाया घट नहीं रहा।
छत्तीसगढ़ मे खैरागढ़ की घटना ने बता दिया है कि अब बिजली कंपनी सरकारी दफ्तरों को भी आम उपभोक्ता की तरह ही ट्रीट करेगी। बिल नहीं तो बत्ती नहीं।





