छत्तीसगढ़ मे लचर कार्यप्रणाली से दम तोड़ता नल जल मिशन

हर घर नल-जल का दावा फेल: सरगुजा-बस्तर में आज भी ढोड़ी-नाले का गंदा पानी पीने को लोग मजबूर – बीमारियों से असमय होती है मौतें

जल जीवन मिशन पर 2 हजार करोड़ खर्च- फिर भी सरगुजा से बस्तर तक टंकियां अधूरी, पाइपलाइन में पानी नहीं -गांवों में मौसमी बीमारियों का प्रकोप

छत्तीसगढ़ —
सरकार हर घर शुद्ध पेयजल के लाख दावे कर ले, लेकिन सरगुजा और बस्तर संभाग की जमीनी हकीकत इन दावों को कमजोर कर रही है। सूत्रों की यदि माने तो छत्तीसगढ़ के दो सबसे बड़े आदिवासी संभागों में आज भी ग्रामीण ढोड़ी, कुआ और नालों का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। इसी गंदे पानी से डायरिया, पीलिया, टायफाइड फैलने की बात कही जा रही है और असमय मौतें भी होने के आरोप भी राजनैतिक दलों द्वारा लगाए जा रहे है

सरगुजा संभाग – सभी जगह एक ही हाल–
सरगुजा संभाग मे एमसीबी ले कर जशपुर जिले तक जल जीवन मिशन धरातल मे कमजोर लेकिन शासकीय दस्तावेजो मे बहुत मजबूत बताया जाता रहा है ज्यादा स्थानों पर जीवन मिशन की टंकिया आधा अधूरी नजर आती है वहीं कुछ स्थानों पर जमीन के ऊपरी सतह पर ही नियमों के विपरीत पाइप लाइन बिछा कर भ्रस्टाचार के दम पर मन मुताबिक बिल निकलने के आरोप सामने आ रहे है जिसमे सूरजपुर व बलरामपुर जिलों की स्थिति ज्यादा खराब बताई जाती है
जिससे ग्रामीण क्षेत्र के लोग आज भी मजबूरन ढोड़ी व नदी नालो का पानी पीने के लिए विवश है

बस्तर संभाग – टंकी बनी, पानी नहीं आया

जानकर सूत्रों के अनुसार बस्तर संभाग मे एकाद जिलों को छोड़ दे तो सभी जिलों मे जल जीवन का काम दयनीय स्थिति मे है कांकेर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा और सुकमा में 70% से ज्यादा बसाहटों में नल कनेक्शन का बोर्ड लग गया, पर जल नहीं। सुकमा के अंदरूनी गांवों में सोलर आधारित टंकियां बनीं, पर मेंटेनेंस नहीं होने से बंद। बीजापुर में दूषित पानी पीने से बडो के साथ बच्चे मौसमी बीमारियों से पीड़ित हो रहे है

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार बरसात में बस्तर संभाग में जलजनित बीमारियों के मामले 40% बढ़ जाते हैं, जिसकी बड़ी वजह दूषित पानी है।

सरकारी दावे बनाम हकीकत–

प्रदेश में जल जीवन मिशन पर 2000 करोड़ से ज्यादा खर्च का दावा है। PHE विभाग कहता है – 38 लाख घरों में नल कनेक्शन। लेकिन जमीनी सच –

1. ठेकेदारों की लापरवाही – टंकी अधूरी, पाइपलाइन लीकेज।
2. बिजली नहीं होने से मोटर नहीं चलती।
3. सोर्स ही सूखा – कई गांवों में बोर फेल।

सही मायनो मे कहा जाये तो जब तक टंकी से नल तक पानी नहीं पहुंचता, और नल से लोगो के घरो मे जल तब तक सरगुजा-बस्तर के रहवासियो के लिए ‘हर घर जल’ सिर्फ नारा बने रहेगा और ढोड़ी व नालो का गंदा पानी ही जीवन का सहारा।

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