पुलिस महकमे के भरोसेमंद साथी हैं पुलिस डॉग
पुलिस महकमे में प्रशिक्षित डॉग स्क्वायड अपराध की गुत्थियां सुलझाने में अहम भूमिका निभाता है। अपराध स्थल पर आरोपियों द्वारा छोड़े गए कपड़े, जूते, हथियार या अन्य वस्तुओं की गंध के आधार पर पुलिस डॉग संदिग्धों तक पहुंचने में मदद करते हैं। कई बार ऐसे मामलों में भी पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिल जाता है, जहां प्रत्यक्ष साक्ष्य कम होते हैं।
पुलिस विभाग के बड़े अधिकारियो के अनुसार पुलिस डॉग को प्रशिक्षित करना आसान काम नहीं है। इसके लिए लंबे समय तक नियमित अभ्यास, अनुशासन और हैंडलर के साथ समन्वय जरूरी होता है। अलग-अलग डॉग को उनकी क्षमता के अनुसार ट्रैकिंग, विस्फोटक पदार्थ, मादक पदार्थ, हथियार और अपराधियों की तलाश जैसे कार्यों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। खास बात यह है कि पुलिस डॉग अपने प्रशिक्षक के निर्देश, आवाज और इशारों को पहचानकर उसी के अनुसार काम करते हैं।

हाल ही मे छत्तीसगढ़ के सरगुजा में पुलिस डॉग कोका ने चोरी के एक महत्वपूर्ण मामले की जांच में अपनी दक्षता का परिचय दिया। आरोपियों द्वारा छोड़े गए कपड़े को सुराग बनाकर कोका संदिग्धों के घर तक पहुंचा और पुलिस को मामले की कड़ी जोड़ने में मदद मिली। इस तरह की घटनाएं बताती हैं कि आधुनिक तकनीक और पारंपरिक पुलिसिंग के साथ डॉग स्क्वायड आज भी अपराध अनुसंधान का प्रभावी माध्यम है।
पुलिस डॉग को लेकर एक और महत्वपूर्ण पहलू उनकी सेवा व्यवस्था है। कई राज्यों में उनकी सेवा अवधि, कार्यक्षमता और जिम्मेदारियों के अनुरूप डॉग स्क्वायड में अलग-अलग श्रेणियां और सम्मानजनक रैंक निर्धारित किए जाते हैं। उनके पद और विशेषज्ञता के अनुसार प्रशिक्षण, आहार और देखभाल की व्यवस्था की जाती है। सेवा पूरी होने के बाद सेवानिवृत्त पुलिस डॉग के लिए भी निर्धारित सुविधाएं और देखभाल का प्रावधान रहता है।

पुलिस अधिकारी की यदि माने तो पुलिस डॉग केवल विभाग के कर्मचारी नहीं, बल्कि अपराध जांच में पुलिस के भरोसेमंद सहयोगी माने जाते हैं। उनकी सूंघने की असाधारण क्षमता और प्रशिक्षक के साथ तालमेल कई कठिन मामलों को सुलझाने में निर्णायक साबित होता है।बहरहाल वर्तमान मे तो सरगुजा का पुलिस डाग कोका की चर्चा जोरो पर है जिसने रहस्यो मे लिपटी की एक बड़ी चोरी की परतो को महज एक कपडे के टुकड़े के सहारे पुलिस टीम को चोर गिरोह तक पहुंचा कर पुलिस महकमे मे ईनाम का हकदार बन गया





