290 रुपये से सीधे 34 हजार! स्मार्ट मीटर के बिल ने बुजुर्ग महिला के सामने खड़ा किया जीवन-मरण का सवाल

एमसीबी में बिजली बिलिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल-, उपभोक्ता परेशान; विभाग का जवाब—पहले जमा करें पूरी राशि, फिर होगी सुनवाई
छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर और बिजली बिलिंग व्यवस्था को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। सामान्य घरेलू खपत करने वाले उपभोक्ताओं के बीच अचानक हजारों रुपये के बिल पहुंचने की शिकायतें अब व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रही हैं। एमसीबी जिले के चंवारीडांड में एक बुजुर्ग महिला के मामले ने इस परेशानी को बेहद गंभीर रूप दे दिया है।

290 रुपये का बिल आता था, अचानक पहुंचा 34 हजार-

बताया जा रहा है कि बुजुर्ग महिला के घर का मासिक बिजली बिल सामान्य तौर पर करीब 290 रुपये आता था। लेकिन अचानक करीब 34 हजार रुपये का बिल पहुंचने से परिवार की मुश्किलें बढ़ गईं। इतनी बड़ी राशि देखकर महिला ने बिजली विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों से बिल की जांच और सुधार की गुहार लगाई।

परिजनों का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब नियमित रूप से मामूली बिल आता रहा, तो अचानक इतनी बड़ी राशि किस आधार पर निर्धारित हुई और इसकी तकनीकी जांच क्यों नहीं की जा रही है?

पहले बिल भरो, फिर होगी सुनवाई?

शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार विभागीय स्तर पर उन्हें पहले पूरी राशि जमा करने और उसके बाद सुनवाई की बात कही गई। यह रवैया उन उपभोक्ताओं के लिए बड़ी परेशानी बन सकता है जो भारी-भरकम बिल को गलत मानते हुए सुधार की मांग कर रहे हैं।

विभागीय स्तर पर यह भी कहा गया कि बिल रायपुर से आया है और स्थानीय स्तर पर इसमें सुधार संभव नहीं है। यदि यही प्रक्रिया है, तो सवाल उठता है कि दूरदराज के ग्रामीण उपभोक्ता गलत बिल की शिकायत लेकर आखिर कहां और किस स्तर पर जाएं?

स्मार्ट मीटर या बढ़ती उपभोक्ता परेशानी?

स्मार्ट मीटर को बिजली व्यवस्था में पारदर्शिता और बेहतर बिलिंग का माध्यम बताया जाता है। लेकिन यदि सामान्य खपत वाले घरों में अचानक हजारों रुपये के बिल आने की शिकायतें सामने आती हैं, तो मीटर रीडिंग, बिलिंग सॉफ्टवेयर, पुराने बकाया, लोड और वास्तविक खपत की स्वतंत्र जांच की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

बिजली बिल अब सियासी मुद्दा भी-

छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर और बढ़े बिजली बिल को लेकर कांग्रेस लगातार सरकार और बिजली विभाग के खिलाफ आंदोलन कर रही है। पार्टी इस मुद्दे को उपभोक्ताओं की परेशानी से जोड़कर शासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है।जिससे अब बड़ी संख्या मे उपभोक्ता व मतदाता भी सहमत होते दिख रहे है जिससे वाले समय मे राजनीतिक चक्र और चुनावी विमर्श में बिजली बिल और स्मार्ट मीटर बड़ा मुद्दा बनने से इंकार नहीं किया जा सकता है और इसका असर किस पर कितना होगा यह आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा। फिलहाल इतना जरूर है कि 34 हजार रुपये का बिल पाने वाली बुजुर्ग महिला जैसे मामलों में उपभोक्ता को पहले राहत, पारदर्शी जांच और स्पष्ट जवाब चाहिए—बिना समाधान के सिर्फ भुगतान का दबाव जनमानस कहीं से उचित नहीं माना रहा है

वास्तव मे बिजली विभाग और शासन की जिम्मेदारी है कि ऐसे असामान्य बिलों की शिकायतों की समयबद्ध तकनीकी जांच कराई जाए और सही बिलिंग व्यवस्था पर उपभोक्ताओं का भरोसा कायम किया जाए। अन्यथा बिजली विभाग के साथ शासन प्रशासन की छवि धूमिल होने से इंकार नहीं किया जा सकता है?

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