छत्तीसगढ़ में पटवारियों की हड़ताल पर सरकार का बड़ा प्रहार, 819 को नोटिस और 5 निलंबित; अब आर-पार की लड़ाई के आसार

छत्तीसगढ़ में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल अब शासन और पटवारी संघ के बीच सीधे टकराव का रूप लेती जा रही है। 13 अक्टूबर से जारी प्रदेशव्यापी आंदोलन के 19वें दिन सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई का शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सरगुजा संभाग के सभी छह जिलों के 819 पटवारियों को तत्काल काम पर लौटने का अल्टीमेटम देते हुए एसडीएम के माध्यम से शो-कॉज नोटिस जारी किए गए हैं। बलरामपुर में पांच पटवारियों पर निलंबन की कार्रवाई भी हुई है।

संभागवार आंकड़ों में सूरजपुर के 192, सरगुजा के 216, कोरिया के 60, एमसीबी के 51, जशपुर के 150 और बलरामपुर के 150 पटवारी शामिल हैं। बिलासपुर में भी 259 पटवारियों को नोटिस जारी किए जाने से स्पष्ट है कि प्रशासनिक सख्ती का दायरा लगातार बढ़ रहा है।

पटवारियों की हड़ताल का सबसे बड़ा खामियाजा किसानों और आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। डिजिटल क्रॉप सर्वे, एग्रीस्टैक, धान खरीदी के लिए किसान अभिलेखों का सत्यापन, फसल क्षति का आकलन, मुआवजा, नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन तथा आय-जाति-निवास प्रमाणपत्रों के काम प्रभावित हैं। इससे किसानों की धान खरीदी, राहत राशि और आम लोगों के राजस्व संबंधी काम अटक रहे हैं।

दूसरी ओर, पटवारी संघ पीवी ऐप की तकनीकी एवं व्यावहारिक समस्याओं के समाधान, वेतन विसंगति दूर करने और पदोन्नति सहित लंबित मांगों पर अड़ा है।

शासन ने अब अनुपस्थिति को अनधिकृत मानते हुए वेतन एवं सेवा लाभ रोकने, अनुशासनात्मक कार्रवाई और अनुपस्थिति अवधि को ‘ब्रेक इन सर्विस’ मानने की चेतावनी दी है। सवाल यह है कि क्या सरकारी सख्ती से हड़ताल टूटेगी या आंदोलन और उग्र होगा? फिलहाल इस टकराव में सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता और किसानों का हो रहा है।

About The Author

इन्हें भी पढ़े