चक्रवात ‘अर्नब’ का कहर: आंध्र से छत्तीसगढ़ तक मौसम का महापलट, सरगुजा संभाग में किसानों की बढ़ी चिंता

कहीं खेतों में पानी, कहीं फसल बर्बादी का खतरा; सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, जशपुर और कोरिया पर टिकी निगाहें
छत्तीसगढ़ – आसमान में घने बादल, तेज हवाओं का शोर और खेतों में खड़ी फसलों पर मंडराता संकट—चक्रवात ‘अर्नब’ ने देश के बड़े हिस्से में मौसम का मिजाज बदल दिया है। समुद्र तट से उठे तूफान का असर अब आंतरिक राज्यों तक पहुंच चुका है। आंध्र प्रदेश में भारी तबाही और जनजीवन प्रभावित होने के बाद ओडिशा, तेलंगाना तथा छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में बारिश, तेज हवाओं और जलभराव की चुनौती खड़ी हो गई है। मौसम की यह करवट किसानों की मेहनत, आम लोगों की दिनचर्या और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की परीक्षा ले रही है।

सरगुजा संभाग में बढ़ी सतर्कता-

छत्तीसगढ़ के सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, जशपुर और कोरिया जिलों में मौसम की स्थिति पर विशेष नजर रखना जरूरी है। रायगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों में भी बारिश और तेज हवाओं का असर कृषि तथा आवागमन को प्रभावित कर सकता है। स्थानीय स्तर पर वास्तविक नुकसान का आकलन वर्षा की मात्रा और खेतों की स्थिति के आधार पर ही स्पष्ट होगा।

किसानों के लिए राहत भी, आफत भी-

बारिश से मिट्टी में नमी बढ़ने, जलस्रोतों को भरने और आगामी रबी फसलों की बुवाई के लिए जमीन तैयार होने में मदद मिल सकती है। लेकिन यही बारिश यदि जरूरत से ज्यादा हुई, तो खेतों में जलभराव, धान की तैयार फसल को नुकसान, कटाई-मड़ाई में देरी, सब्जियों के सड़ने और मिट्टी के कटाव का कारण बन सकती है। तेज हवाओं से पेड़, बिजली के खंभे और फसलों को भी नुकसान पहुंच सकता है।

आम लोगों की मुश्किलें बढ़ने की आशंका-

ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन, बिजली और संचार सेवाएं बाधित होने का खतरा है। दिहाड़ी मजदूरों, छोटे दुकानदारों और कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। फिलहाल जरूरत है कि किसान कटी फसल सुरक्षित रखें, खेतों से अतिरिक्त पानी निकालें और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें। राहत की बारिश कहीं संकट की बाढ़ न बन जाए—यही सबसे बड़ी चिंता है।

About The Author

इन्हें भी पढ़े