भारी बारिश से थमी खदानें – देश के 45 बिजली घरों में कोयले का संकट -छत्तीसगढ़ सुरक्षित

CEA की रिपोर्ट में खुलासा – 186 में से 45 प्लांट क्रिटिकल श्रेणी में -राजस्थान, यूपी, गुजरात में 25% से कम स्टॉक- SECL की गेवरा-दीपका-कुसमुंडा मेगा खदानों में उत्पादन 40% घटा-छत्तीसगढ़ –

सावन-भादो की झमाझम बारिश ने देश के पावर सेक्टर की सांसे फुला दी हैं। कोयला खदानों में पानी भरने और कैप्टिव कोल ब्लॉक्स का खनन ठप होने से देश के 45 प्रमुख बिजली घरों में कोयले का स्टॉक खतरनाक यानी क्रिटिकल स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि छत्तीसगढ़ के बिजली घर फिलहाल सुरक्षित हैं। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की ताजा रिपोर्ट के अनुसार देश के 186 प्रमुख थर्मल पावर प्लांटों में से 45 में तय मानक का 25 प्रतिशत से भी कम कोयला बचा है। जुलाई अंत तक यह संख्या 31 थी, जो एक महीने में 45 हो गई। सभी प्लांटों को मिलाकर कुल भंडार 3.095 करोड़ टन ही बचा है, जो औसतन 10 दिन ही चलेगा। जुलाई में यह स्टॉक 12 दिन का था। अगस्त में स्टॉक में 19 फीसदी की गिरावट आई है।

क्यों गहराया संकट-
इस संबंध मे SECL प्रवक्ता डॉ. सनिष चंद्र के अनुसार – “बिजली घरों को उनकी जरूरत के अनुसार बिना रुकावट कोयला पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है, ताकि देश में बिजली उत्पादन ठप न हो। बारिश से खनन पर आंशिक असर पड़ा है, लेकिन आपूर्ति का सिलसिला लगातार जारी है।”

दरअसल छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड, जहां देश का 70 प्रतिशत कोयला निकलता है, वहां लगातार बारिश से ओपनकास्ट खदानों में पानी भरने की खबर है छत्तीसगढ़ मे कोरबा की गेवरा, दीपका और कुसमुंडा जैसी देश की सबसे बड़ी मेगा परियोजनाओं में भी लगातार बारिश से उत्पादन प्रभावित हो गया है।

तीन राज्यों में सबसे गंभीर हालात-
जानकर सूत्रों के अनुसार
CEA के नियमों के मुताबिक हर बिजली घर में कम से कम 19 से 21 दिन का कोयला रिजर्व होना चाहिए। लेकिन वर्तमान मे स्थिति इस प्रकार बताई जाती है

– राजस्थान: राज्य के 7 बिजली संयंत्रों को रोज 1.4 लाख टन कोयले की जरूरत है। नॉर्म के अनुसार 21.87 लाख टन स्टॉक होना चाहिए, लेकिन बचा है सिर्फ 4.44 लाख टन। 5 प्लांट क्रिटिकल श्रेणी में हैं।

– उत्तर प्रदेश: 6 विद्युत संयंत्रों में रोज 1.32 लाख टन की खपत है। जरूरत 24.73 लाख टन की है, लेकिन स्टॉक 8.00 लाख टन ही बचा है।

– गुजरात: 4010 मेगावाट क्षमता वाले 3 पावर प्लांटों की दैनिक खपत 58 हजार टन है। 12.9 लाख टन स्टॉक चाहिए, लेकिन 6.51 लाख टन ही शेष है। लेकिन

राहत की बात है कि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी के बिजली घरों पर फिलहाल कोई संकट नहीं है। कंपनी की कुल क्षमता 2840 मेगावाट है, जिसे रोजाना 44 हजार टन कोयले की आवश्यकता होती है। नियमानुसार प्रदेश में 7.48 लाख टन का स्टॉक होना चाहिए, जबकि वर्तमान में कंपनी के पास 8.30 लाख टन कोयला मौजूद है। इसका कारण छत्तीसगढ़ के
कोरबा जिला स्थित मेगा खदानों से राज्य के HTPS, DSPM, मड़वा के साथ-साथ NTPC कोरबा, सीपत और निजी क्षेत्र के बालको व KPL को नियमित कोयला भेजा जाना रहा है।

कोयला मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियो का कहना था कि मंत्रालय सभी बिजली घरों की नियमित निगरानी कर रहा है और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त आवंटन किया जा रहा है। लेकिन बारिश के दिनों मे प्रतिवर्ष आने वाले कोयला संकट के लिए प्रभावित होने वाले थर्मल पावरो तथा उनके राज्यों द्वारा इस संकट से बचाव के लिए आखिर ठोस कदम क्यों नहीं उठाया जाता है यह अब यक्ष प्रश्न बनता जा रहा है

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