महतारी वंदन योजना पर सियासी संग्राम: अपात्रों के नाम कटेंगे, वसूली पर कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने

छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आर्थिक संबल देने के उद्देश्य से शुरू हुई महतारी वंदन योजना अब सियासत के नए टकराव का केंद्र बनते जा रही है। योजना में अपात्र हितग्राहियों के नाम काटने और गलत तरीके से प्राप्त राशि की वसूली के मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं। सरकार की कार्रवाई को लेकर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

क्या है महतारी वंदन योजना?

महतारी वंदन योजना की शुरुआत 1 मार्च 2024 को हुई थी। इसके तहत छत्तीसगढ़ की पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये, यानी सालाना 12 हजार रुपये सीधे बैंक खाते में देने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता, स्वास्थ्य और पोषण में सुधार करना है। हालांकि, आयु, निवास और परिवार की आर्थिक एवं सेवा संबंधी निर्धारित शर्तें पूरी करना जरूरी है।

जांच में सामने आए अपात्रता के मामले-

सामने आ रही रिपोर्टों के मुताबिक, दो या अधिक आवेदन, सरकारी सेवा से जुड़े परिवार के सदस्य, आयकरदाता होना और अन्य पात्रता संबंधी कारणों से हजारों मामले जांच के दायरे में आए हैं। कुछ मामलों में राशि की वसूली भी की बात सुनाई जा रही है। इस विषय पर कांग्रेस ने करोड़ों रुपये की वसूली को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। ऐसे में लाभार्थियों के नाम काटने और वसूली की कार्रवाई चर्चा में होने के साथ राजनैतिक गर्माहट का कारण बन रहे है l

कांग्रेस का हमला, भाजपा का पलटवार-

छत्तीसगढ़ मे कांग्रेस के पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा मौका देखकर राजनीति करती है। उनके मुताबिक, जरूरत के समय पैसा देने और बाद में वसूली करने की कार्रवाई विरोधाभासी है। कांग्रेस का सवाल है कि यदि महिलाएं अपात्र थीं, तो सरकारी सत्यापन के बाद उन्हें लंबे समय तक भुगतान कैसे होता रहा? गलती व्यवस्था की है तो उसका बोझ महिलाओं पर क्यों पड़े?

वहीं, भाजपा का तर्क है कि कांग्रेस को पहले अपने कार्यकाल और चुनावी वादों का हिसाब देना चाहिए। भाजपा नेताओं का कहना है कि नियमों के मुताबिक पात्र महिलाओं को लाभ मिलना चाहिए और अपात्र लोगों से सरकारी धन की वसूली गलत नहीं है।

अब आगे क्या?

महतारी वंदन योजना पर यह विवाद केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी जवाबदेही और महिला हितग्राहियों के अधिकारों से भी जुड़ा है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार अपात्रता की जांच और वसूली में पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित करती है तथा वास्तविक पात्र महिलाओं को राहत कैसे मिलती है।

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