पटवारियों की हड़ताल से जनता बेहाल, सिस्टम लाचार! किसानों की ऋण प्रक्रिया अटकी, आम आदमी के काम ठप; आश्वासनों की घुट्टी से बढ़ रहा आक्रोश
धान की फसल खेतों में, जरूरत के वक्त किसान परेशान; राजस्व कार्यालयों से लेकर आम जनता तक हड़ताल की मार, आखिर कब जागेगा शासन-प्रशासन?
छत्तीसगढ़- खेतों में धान की फसल तैयार हो रही है, किसानों को खेती-किसानी के लिए पैसों की जरूरत है, लेकिन छत्तीसगढ़ मे राजस्व पटवारी संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने किसानों और आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। एक ओर किसान जिला सहकारी केंद्रीय बैंक से ऋण लेने की प्रक्रिया को लेकर परेशान हैं, तो दूसरी ओर पटवारी से जुड़े जरूरी राजस्व कार्यों के लिए आम नागरिक दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। विडंबना देखिए, जनता को राहत देने वाली व्यवस्था ही अब उसके लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है।

खेत में फसल, हाथ में जरूरतों का बोझ; किसान आखिर जाएं तो जाएं कहां?
धान की खेती के अहम दौर में किसानों को खाद, बीज, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों के लिए आर्थिक सहायता की जरूरत है। ऐसे में पटवारियों की हड़ताल से राजस्व दस्तावेजों और संबंधित प्रक्रियाओं में आने वाली बाधाएं किसानों की चिंता बढ़ा रही हैं। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक से ऋण लेने वाले किसानों के सामने भी जरूरी औपचारिकताओं को लेकर परेशानी खड़ी हो रही है। सवाल यह है कि खेती के महत्वपूर्ण समय में किसान अपनी समस्याएं लेकर आखिर किसके दरवाजे पर दस्तक दें?
आम आदमी के काम ठप, दफ्तरों के चक्कर और इंतजार-
हड़ताल का असर जमीन संबंधी दस्तावेजों, नामांतरण, सीमांकन और अन्य राजस्व कार्यों पर भी पड़ रहा है। जरूरी काम अटकने से लोगों को समय, पैसा और मेहनत गंवानी पड़ रही है। जिन कार्यों के लिए पटवारी की रिपोर्ट या सत्यापन जरूरी है, उनके लिए लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।
आश्वासन पर आश्वासन, समाधान का नामोनिशान नहीं!
पटवारियों की मांगों और शासन-प्रशासन के बीच जारी गतिरोध का खामियाजा आखिर आम जनता क्यों भुगते? हड़ताल लंबी खिंचने के साथ लोगों में नाराजगी भी बढ़ रही है। जनता का सवाल साफ है—मांगों का समाधान निकालने के लिए ठोस पहल कब होगी और आम लोगों को राहत कब मिलेगी?
अब शासन-प्रशासन के सामने चुनौती केवल हड़ताल समाप्त कराने की नहीं, बल्कि जनता का भरोसा बहाल करने की भी है। बातचीत और निर्णायक पहल में देरी जारी रही, तो किसानों की चिंता और आम जनता का आक्रोश दोनों और गहराने की आशंका है।





