रायगढ़ की घटना ने खोला सुरक्षा का सवाल: क्या छत्तीसगढ़ में मॉर्निंग-इवनिंग वॉक भी जोखिम भरा?
छत्तीसगढ़ – स्वस्थ रहने के लिए सुबह-शाम घर से निकलना अब कहीं नागरिकों के लिए खतरे का सबब तो नहीं बनता जा रहा? रायगढ़ के पुसौर थाना क्षेत्र में डिग्री कॉलेज के प्रोफेसर के अपहरण और यूपीआई के जरिए एक लाख रुपये ट्रांसफर करवाने की घटना ने इस सवाल को फिर से सामने ला खड़ा किया है। घटना में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया और रकम बरामद की, लेकिन इससे वह बड़ा सवाल खत्म नहीं होता जो इस वारदात ने समाज के सामने खड़ा किया है।
खबरों के अनुसार इवनिंग वॉक पर निकले प्रोफेसर को दो लोगों ने कथित तौर पर पकड़ लिया, आंखों पर पट्टी बांधी, चाकू के बल पर जान से मारने की धमकी दी और मोटरसाइकिल से दूसरे स्थान पर ले जाकर मोबाइल, गूगल-पे तथा अन्य डिजिटल भुगतान से जुड़ी जानकारी हासिल कर एक लाख रुपये ट्रांसफर करवाए। अगर कोई व्यक्ति अपने ही शहर में शाम की सैर के दौरान इस तरह अपराधियों के निशाने पर आ सकता है, तो आम नागरिकों के मन में सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

मामला केवल एक वारदात का नहीं है। छत्तीसगढ़ के विभिन्न हिस्सों में राह चलते लोगों से लूट, महिलाओं के गले से चेन और जेवर खींचने तथा सुनसान रास्तों पर अपराध की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। इसके साथ ही युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति और उसके संभावित अपराध से जुड़ाव को लेकर भी समाज में चिंता बढ़ रही है। नशे का तेजी से फैलता नेटवर्क केवल स्वास्थ्य का संकट नहीं, बल्कि परिवार, सामाजिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर अपराधियों में कानून का भय क्यों कमजोर पड़ रहा है? क्या पुलिस की पेट्रोलिंग पर्याप्त है? क्या संवेदनशील इलाकों की पहचान कर वहां निगरानी बढ़ाई जा रही है? और नशे के अवैध कारोबार की जड़ तक पहुंचने के लिए कार्रवाई कितनी प्रभावी है?
घटना के बाद आरोपी पकड़ लेना पुलिस की जिम्मेदारी का एक हिस्सा है, लेकिन असली कसौटी अपराध को होने से रोकना है। यदि नागरिकों को सुबह की सैर, शाम की वॉक या अकेले सड़क पर निकलते समय भी सुरक्षा की चिंता सताने लगे तो यह प्रशासन के लिए गंभीर चेतावनी है।
इस सबंध मे सामाजिक लोगो का कहना है कि शासन और पुलिस प्रशासन को अब बयान कम पर दिखाई देने वाली कार्रवाई करनी होगी साथ ही —नशे के नेटवर्क पर प्रहार, संवेदनशील इलाकों में प्रभावी पेट्रोलिंग, सीसीटीवी निगरानी और त्वरित पुलिस सहायता की ठोस रणनीति पर काम करना होगा जिससे कि नागरिकों को डरकर घरों में बंद होने की सोच बदल कर सुरक्षित माहौल का भरोसा आना चाहिए क्योंकि यहीं शासन व कानून की जिम्मेदारी भी है l






