छत्तीसगढ़ मे राज्य परिवहन निगम बंद: घाटे का सौदा था या निजी बस लॉबी के फायदे की पटकथा?
12 डिपो, 600 बसें, 2250 से अधिक कर्मचारी और करोड़ों का कारोबार—फिर अचानक बंद क्यों? 172 करोड़ में संपत्तियों की बिक्री पर भी उठे सवाल
छत्तीसगढ़ राज्य बनने के शुरुआती दौर में राज्य परिवहन निगम को कथित घाटे, अव्यवस्था और विभिन्न आरोपों के आधार पर बंद कर दिया गया। लेकिन वर्षों बाद भी एक बड़ा सवाल जस का तस खड़ा है—क्या राज्य परिवहन निगम को वास्तव में आर्थिक मजबूरी के कारण बंद किया गया था, या इसके पीछे निजी बस संचालकों को लाभ पहुंचाने वाली कोई सुनियोजित व्यवस्था काम कर रही थी?
बताया जाता है कि निगम के पास 12 डिपो, लगभग 600 बसें और 2250 से अधिक कर्मचारी थे तथा इसकी मासिक आय करीब 15 करोड़ रुपये तक बताई जाती थी। इसके बावजूद हर महीने लगभग 8 करोड़ रुपये के घाटे का हवाला देकर निगम को बंद करने का फैसला किया गया। बाद में निगम की संपत्तियों को करीब 172 करोड़ रुपये में बेचने की प्रक्रिया ने भी कई सवालों को जन्म दिया।

सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि क्या छत्तीसगढ़ के गठन के साथ ही राज्य परिवहन निगम को समाप्त करने का निर्णय पहले से तय था? क्या तत्कालीन मध्यप्रदेश और बाद में छत्तीसगढ़ के कुछ अधिकारियों एवं राजनीतिक प्रभावशाली लोगों की भूमिका की भी जांच हुई? क्या निगम को सुधारने, पुनर्गठित करने या सार्वजनिक परिवहन के आधुनिक मॉडल में बदलने के विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया गया था?
आज जब दूसरे राज्यों में सरकारी बस परिवहन को नए मॉडल के साथ मजबूत करने की कोशिशें हो रही हैं और मध्यप्रदेश में हजारों बसों को फिर सड़कों पर उतारने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं, तब छत्तीसगढ़ में सरकारी परिवहन व्यवस्था लगभग निष्क्रिय क्यों है?
पीपीपी मॉडल अथवा अन्य योजनाओं के नाम पर सार्वजनिक परिवहन की जिम्मेदारी निजी क्षेत्र को सौंपना क्या वास्तव में जनहित का समाधान है? या फिर यह सवाल भी जांच का विषय होना चाहिए कि इससे सबसे अधिक लाभ किसे मिला?
वास्तव मे गरीब, मजदूर, विद्यार्थी, ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के लिए सरकारी बस केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि सस्ती और सुरक्षित आवाजाही की जीवनरेखा होती है। निजी बसों पर निर्भरता बढ़ने का सीधा असर किराए और ग्रामीण कनेक्टिविटी पर पड़ सकता है।
अब जरूरत आरोप-प्रत्यारोप की नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच, पुराने रिकॉर्ड सार्वजनिक करने और राज्य परिवहन निगम को बंद करने के पूरे फैसले का श्वेतपत्र जारी करने की है। आखिर जनता जानना चाहती है—राज्य परिवहन निगम सचमुच घाटे के कारण बंद हुआ था, या फिर घाटा केवल उसे बंद करने का बहाना था?






