महादेव सट्टा किंग सौरभ चंद्राकर की वापसी से छत्तीसगढ़ की सियासत में भूचाल CBI की गिरफ्त में खुलेंगे सत्ता, सिस्टम और सफेदपोशों के राज?
ओमान से रायपुर पहुंचा महादेव ऑनलाइन सट्टा का कथित मास्टरमाइंड, आज CBI कोर्ट में पेशी; अब उठेगा सबसे बड़ा सवाल—आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा था हजारों करोड़ का सट्टा साम्राज्य?
छत्तीसगढ़ की राजनीति में लंबे समय से हलचल मचाने वाले महादेव ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क के प्रमुख प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाकर CBI ने एक बड़ी कार्रवाई की है। 2 नवंबर को उसे रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया जाना है। उसकी भारत वापसी ने छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर हलचल तेज कर दी है।
सवाल सिर्फ ऑनलाइन सट्टे के अवैध कारोबार का नहीं है, बल्कि उस पूरे नेटवर्क का है, जिसने कथित तौर पर हजारों करोड़ रुपये का साम्राज्य खड़ा किया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क का संचालन विदेशों से किया जाता था। देशभर में पैनल और शाखाओं के जरिए सट्टा संचालित होता था। रकम को म्यूल बैंक खातों, कई स्तरों के लेनदेन और हवाला के रास्ते विदेश भेजने के आरोप भी हैं।

CBI की जांच में सरकारी अधिकारियों को संरक्षण राशि दिए जाने की बात भी सामने आई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर किन अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों की कथित मिलीभगत से यह कारोबार इतने लंबे समय तक चलता रहा? क्या राजनीतिक संरक्षण भी इस नेटवर्क की ताकत बना हुआ था? किन सफेदपोश चेहरों तक इस अवैध कमाई का हिस्सा पहुंचा?
बिना किसी प्रभावशाली संरक्षण और व्यवस्था में सेंध लगाए इतना बड़ा नेटवर्क वर्षों तक कैसे फलता-फूलता रहा, यह जांच का अहम विषय है।
अब सौरभ चंद्राकर की पूछताछ पर सबकी निगाहें टिकी हैं। क्या वह उन नामों का खुलासा करेगा, जो अब तक पर्दे के पीछे रहे हैं? क्या राजनीतिक रसूखदारों और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका सामने आएगी?
सौरभ की गिरफ्तारी महादेव सट्टा कांड का अंत नहीं, बल्कि उन चेहरों तक पहुंचने की शुरुआत साबित हो सकती है, जिनके नाम अब तक रहस्य बने हुए हैं। असली परीक्षा अब CBI की जांच की है।





