पीएम आवास पर बघेल-शर्मा की बहस- आंकड़ों से गरमाई छत्तीसगढ़ की सियासत

रायपुर प्रेस क्लब में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उपमुख्यमंत्री व गृह मंत्री विजय शर्मा की आमने-सामने की बहस ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में नया सियासी विमर्श खड़ा कर दिया है। दोनों नेताओं के बीच करीब 80 मिनट चली बहस में आरोप-प्रत्यारोप के साथ आंकड़ों की जमकर जंग हुई।

भूपेश बघेल का तर्क रहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के आंकड़ों को अलग-अलग मंचों पर अलग तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में करीब 6.97 लाख आवास स्वीकृत हुए और पोर्टल बंद होने तथा केंद्र से राशि नहीं मिलने के कारण योजना प्रभावित हुई। बघेल ने यह भी सवाल उठाया कि मौजूदा सरकार अपने कार्यकाल में स्वीकृत और पूर्ण हुए आवासों का स्पष्ट हिसाब दे।

इसके जवाब में विजय शर्मा ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही 18 लाख आवासों का संकल्प लिया और बड़ी संख्या में आवास पूरे किए। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में 11 लाख से अधिक आवास पूरे हो चुके हैं तथा 2025-26 में छत्तीसगढ़ ने देश में सर्वाधिक प्रधानमंत्री आवास बनाए। सरकार के अनुसार उस अवधि में 5.92 लाख से अधिक आवास पूर्ण हुए।

इस बहस का महत्व केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है। प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब परिवारों के लिए सीधे जीवन-स्तर से जुड़ा मुद्दा है और 2023 के विधानसभा चुनाव में भी यह भाजपा के प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में रहा था।

राजनीतिक दृष्टि से देखें तो विजय शर्मा के लिए यह बहस निश्चित रूप से महत्वपूर्ण रही। उन्होंने आंकड़ों के साथ सरकार का पक्ष आक्रामक ढंग से रखा और वरिष्ठ विपक्षी नेता भूपेश बघेल के सामने सीधे मुकाबले की राजनीतिक क्षमता प्रदर्शित की। इसे भाजपा संगठन और सरकार में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की दिशा में उनके लिए सकारात्मक प्रदर्शन माना जा सकता है। हालांकि केवल एक बहस के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि उन्होंने भाजपा में अपनी जड़ें निर्णायक रूप से मजबूत कर ली हैं।

आने वाले समय में ऐसी बहसों की संभावना इसलिए भी बढ़ सकती है क्योंकि 2028 का विधानसभा चुनाव दूर नहीं है। आवास, किसान, रोजगार, कानून-व्यवस्था और विकास जैसे सीधे जनसरोकार के मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष के बीच सार्वजनिक आंकड़ा-युद्ध छत्तीसगढ़ की राजनीति का नया स्वरूप बन सकता है। आज की बहस ने कम-से-कम इतना स्पष्ट कर दिया है कि दोनों पक्ष अब केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि सार्वजनिक मंच पर आंकड़ों के साथ एक-दूसरे को चुनौती देने की राह पर हैं। राजनैतिक आंकड़ेबाज कहते है कि आज की बहस में राजनीतिक बढ़त का आकलन करें तो विजय शर्मा ने सरकार के उपलब्धियों वाले आंकड़ों को प्रभावी ढंग से सामने रखकर अपनी आक्रामक राजनीतिक शैली और तैयारी का प्रदर्शन किया। लेकिन बघेल का अनुभव और आंकड़ों की व्याख्या पर उनकी पकड़ भी इस मुकाबले को एकतरफा नहीं बनने देती। इसलिए इसे विजय शर्मा की महत्वपूर्ण राजनीतिक पारी कहना उचित होगा, लेकिन इसे उनकी भाजपा में स्थिति मजबूत होने का अंतिम प्रमाण कहना अभी जल्दबाजी होगी।

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