रीवा का चिरहुलानाथ मंदिर: जहां बजरंगबली की लगती है ‘दिव्य अदालत’, 500 वर्ष पुरानी आस्था का केंद्र

मध्य प्रदेश के रीवा शहर स्थित चिरहुला नाथ हनुमान मंदिर आस्था, लोकविश्वास और धार्मिक परंपराओं का प्रमुख केंद्र माना जाता है। चिरहुला तालाब के किनारे स्थित यह मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है और स्थानीय मान्यता के अनुसार इसकी परंपरा करीब 500 वर्ष पुरानी बताई जाती है। इस मंदिर की स्थापना को संत परंपरा से जोड़ा गया है।

रीवा जिले के चिरहुलानाथ मंदिर की सबसे चर्चित धार्मिक मान्यता इसे ‘हनुमान जी की अदालत’ के रूप में पहचान देती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि भक्त अपनी परेशानियां और मनोकामनाएं लेकर बजरंगबली के दरबार में अर्जी लगाते हैं और संकटों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। इसी लोकविश्वास के कारण मंदिर को कई श्रद्धालु ‘डिस्ट्रिक्ट कोर्ट’ के नाम से भी संबोधित करते हैं।

यहाँ धार्मिक परंपरा की विशेषता आसपास स्थित रामसागर और खेमसागर के हनुमान मंदिरों से भी जुड़ी है। स्थानीय मान्यता में रामसागर को ‘हाईकोर्ट’ और खेमसागर को ‘सुप्रीम कोर्ट’ कहा जाता है। तीनों मंदिरों को हनुमान उपासना की एक धार्मिक श्रृंखला के रूप में देखा जाता है।

मंदिर परिसर की एक अन्य प्रमुख विशेषता 12 ज्योतिर्लिंगों का मंदिर और हवन मंडप है, जिससे यहां हनुमान उपासना के साथ शिव आराधना का भी महत्व बढ़ जाता है।इस मंदिर मे मंगलवार और शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। हनुमान जयंती जैसे अवसरों पर भी यहां विशेष धार्मिक आयोजन और पाठ होते हैं। ख्यातिनाम इस पुरातन मंदिर के जानकार कोरिया के शैलेन्द्र शर्मा बतलाते है कि यहाँ जाने वालों के समस्यायो का जहाँ निदान होता है वहीं सुख शांति की प्राप्ति यहाँ भक्तो को होती है

इस तरह चिरहुलानाथ मंदिर रीवा की धार्मिक पहचान में हनुमान भक्ति, संत परंपरा, शिव आराधना और लोक आस्था के अनूठे संगम के रूप में अपनी अलग ख्याति रखता है।

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