आजादी के बाद अब भी अंधेरे में बंशीपुर; बच्चों का भविष्य प्रभावित, ग्रामीण गांव छोड़ने को मजबूर
छत्तीसगढ़ में विकास और हर गांव तक बिजली पहुंचाने के दावों के बीच कोरिया जिले के वनांचल क्षेत्र में स्थित बंशीपुर गांव की तस्वीर सरकारी दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। आजादी के कई दशकों बाद भी गांव के ग्रामीण बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। हैरानी की बात यह है कि ग्रामीणों की वर्षों की मांग, शिकायतों और लगातार आवाज उठाने के बाद करीब तीन वर्ष पहले बिजली के खंभे तो खड़े कर दिए गए, लेकिन आज तक उन खंभों में बिजली का कनेक्शन नहीं पहुंचा। यह हाल कोरिया के मात्र बंशीपुर की नहीं है बल्कि बताया जाता है कि सरगुजा संभाग मे शासन के नजरे इनायत को तरसते बिजली विहीन ऐसे ग्राम अनगिनत है
लेकिन कोरिया के बंशीपुर मे बिजली के इंतजार में ग्रामीणों की उम्मीदें अब आक्रोश में बदलने लगी हैं। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से लगातार आश्वासन मिलने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। सवाल यह है कि जब बिजली पहुंचाने के लिए खंभे लगाए जा चुके हैं, तो फिर कनेक्शन देने में तीन वर्ष क्यों लग रहे हैं? क्या सरकारी योजनाओं का काम केवल खंभे खड़े करने तक ही सीमित रह गया है?

वैसे कहा जाये तो बंशीपुर की समस्या केवल बिजली की समस्या नहीं है। बिजली के अभाव में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शाम ढलते ही पढ़ाई की व्यवस्था मुश्किल हो जाती है और आधुनिक शिक्षा के लिए जरूरी मोबाइल, इंटरनेट तथा अन्य साधनों का उपयोग भी सीमित हो जाता है। ऐसे में ग्रामीणों को डर है कि उनके बच्चों का भविष्य भी अंधेरे में न चला जाए।


इस गांव मे स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि गांव के कुछ परिवार अब रोजगार और बच्चों के भविष्य के लिए गांव से बाहर भी अपना बसेरा बनाने की सोचने लगे हैं। यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि ग्रामीण आबादी के धीरे-धीरे अपने मूल गांव से दूर होने का संकेत है।
सरगुजा संभाग के बिजली-विहीन गांवों पर भी उठे सवाल-
शासकीय कार्य व योजनाओं मे नजर रखने वालों का कहना है कि बंशीपुर की कहानी अकेली नहीं मानी जा सकती। वनांचल और दूरस्थ क्षेत्रों में आज भी बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित गांवों की स्थिति सरकार और बिजली विभाग के सामने अब बड़ी चुनौती है। छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में ऐसे गांवों की वास्तविक स्थिति क्या है, कितने गांव अब भी बिजली कनेक्शन की प्रतीक्षा कर रहे हैं और कितने गांवों में अधोसंरचना तैयार होने के बावजूद आपूर्ति शुरू नहीं हुई—इसका सार्वजनिक और पारदर्शी आंकड़ा सामने लाने की मांग अब उठने लगी है
वैसे छत्तीसगढ़ के सत्ता सिहासन मे बैठी कोई भी सरकार गांव-गांव विकास पहुंचाने की बात करती है, लेकिन बंशीपुर जैसे गांव अब यह पूछने को मजबूर हैं कि बिजली के खंभे लग जाने के बाद भी बिजली कब आएगी?
सरकार व बिजली विभाग की इस उपेक्षा से आक्रोशित
ग्रामीण अब कहने लगे है कि आश्वासन नहीं, समयबद्ध कार्रवाई और बिजली कनेक्शन चाहिए।वहीं बिजली विभाग और प्रशासन को बंशीपुर समेत सरगुजा संभाग के बिजली-विहीन गांवों की स्थिति सार्वजनिक कर यह बताना चाहिए कि वहां बिजली कब तक पहुंचेगी। वरना सालो से खड़े ये खंभे सरकारी व्यवस्था की उपलब्धि नहीं, बल्कि अधूरे विकास की मूक गवाही बनकर खड़े रहेंगे।





