शी जिनपिंग के लिए ट्रंप का रेड कार्पेट एयरपोर्ट पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति- लेकिन असली खेल बंद कमरे में होगा

नई दिल्ली – 11 साल बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमेरिका पहुंचे तो स्वागत ऐसा हुआ, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पहुंचे और शी जिनपिंग का व्यक्तिगत रूप से स्वागत किया। अमेरिकी राष्ट्रपतियों के लिए विदेशी नेता को एयरपोर्ट पर रिसीव करना असामान्य है।

प्रोटोकॉल टूटा, संदेश क्या है?

सवाल यही है—जिस चीन से अमेरिका की व्यापार, तकनीक, सुरक्षा और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा चल रही है, उसके राष्ट्रपति के लिए ट्रंप इतना बड़ा सम्मान क्यों दिखा रहे हैं?

जवाब शायद स्वागत से ज्यादा हितों की राजनीति में छिपा है।

अमेरिका और चीन दुनिया की दो बड़ी आर्थिक और तकनीकी शक्तियां हैं। दोनों के बीच अविश्वास कायम है, लेकिन दोनों जानते हैं कि खुला टकराव वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। विश्लेषकों के मुताबिक यह गर्मजोशी संबंधों को स्थिर रखने की कोशिश भी है।

टेबल पर पांच बड़े मुद्दे-

बातचीत में व्यापार और टैरिफ, दुर्लभ खनिज व सप्लाई चेन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ताइवान और ईरान जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

यानी कैमरों के सामने मुस्कान है, लेकिन कमरे के भीतर सौदेबाजी बेहद कठिन होने वाली है।

ट्रंप क्या चाहते हैं, शी क्या चाहते हैं?

ट्रंप चीन से आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों पर ठोस रियायतें चाहते हैं, जबकि शी जिनपिंग के लिए अमेरिकी दबाव के बीच चीन की बराबरी और रणनीतिक स्वायत्तता का संदेश महत्वपूर्ण है।

दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत कूटनीति बढ़ी है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इसके नीचे अमेरिका-चीन की प्रतिस्पर्धा और अविश्वास अभी भी मौजूद हैं।

असली परीक्षा अब शुरू होगी-

यह दौरा केवल लाल कालीन और राजकीय भोज का कार्यक्रम नहीं है। अगर व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज, एआई और सुरक्षा मुद्दों पर समझ बनती है तो इससे वैश्विक बाजारों और अमेरिका-चीन संबंधों में तनाव कम करने का रास्ता खुल सकता है।

लेकिन अगर पुराने मतभेद फिर हावी हुए, तो यह भव्य स्वागत केवल कूटनीतिक तस्वीर बनकर रह जाएगा।

अमेरिका और चीन मुस्कुरा जरूर रहे हैं—लेकिन दोनों जानते हैं कि सामने दोस्ती का मंच है और पीछे वैश्विक शक्ति-संतुलन की सबसे बड़ी बाजी।

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