मंत्रालय की बसों में सुरक्षा से खिलवाड़! सीटें बढ़ाने के लिए दरवाजा बंद करने का आरोप, हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?

रायपुर। छत्तीसगढ़ मंत्रालय में कर्मचारियों और यात्रियों के आवागमन के लिए संचालित बस परिवहन व्यवस्था को लेकर सुरक्षा संबंधी सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि अधिक सीटें लगाने के उद्देश्य से कुछ बसों में एक दरवाजे को बंद कर दिया गया है। हालांकि, इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

यदि बसों में निर्धारित निकासी व्यवस्था में किसी तरह का बदलाव किया गया है, तो यह यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर विषय हो सकता है। आग लगने या किसी अन्य आपात स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए पर्याप्त और सुगम निकासी मार्ग बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए बसों की मूल सुरक्षा व्यवस्था में कोई बदलाव किया गया है? यदि ऐसा हुआ है तो इसकी अनुमति किस स्तर पर दी गई और बसों की फिटनेस जांच के दौरान इन पहलुओं की जांच क्यों नहीं की गई?

मंत्रालय की बस परिवहन व्यवस्था में पहले भी सुरक्षा को लेकर घटनाएं सामने आने की बात कही जाती रही है। ऐसे में वर्तमान शिकायतों के बाद बसों की तकनीकी स्थिति, आपातकालीन निकासी व्यवस्था और सुरक्षा मानकों की गंभीरता से जांच की जरूरत महसूस की जा रही है।

बताया जा रहा है कि अधिकारियों की ओर से बसों की फिटनेस जांच कराने की बात कही गई है। इसके बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या नियमित फिटनेस और सुरक्षा निरीक्षण पहले से नहीं किया जा रहा था? यदि नियमित जांच होती रही है तो कथित बदलाव निरीक्षण के दौरान सामने क्यों नहीं आया?

मामला केवल बस संचालन तक सीमित नहीं है। करोड़ों रुपये की बस परिवहन व्यवस्था से जुड़े टेंडर, तकनीकी शर्तों, फिटनेस प्रमाणपत्र, बसों के निरीक्षण और निगरानी व्यवस्था की भी जांच किए जाने की मांग उठ रही है।

यदि जांच में नियमों या सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित बस संचालक के साथ-साथ अनुबंध की शर्तों और निगरानी व्यवस्था की जिम्मेदारी तय करने की भी जरूरत होगी। वहीं, संबंधित विभाग और मंत्रालय की ओर से पूरे मामले पर स्पष्ट स्थिति सामने रखे जाने की अपेक्षा है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बसों की जांच दुर्घटना के बाद होगी या उससे पहले? जांच का उद्देश्य केवल जिम्मेदारी तय करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी होना चाहिए कि किसी संभावित हादसे में यात्रियों की जान जोखिम में न पड़े।

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