भाजपा संगठन में फेरबदल- क्या छत्तीसगढ़ में अब कार्यकर्ता और जनहित के कामों को मिलेगी नई रफ्तार?

छत्तीसगढ़ – भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में हुए बड़े फेरबदल का असर छत्तीसगढ़ में भी साफ दिखाई दिया है। पार्टी ने कर्मवीर सिंह को छत्तीसगढ़ का प्रदेश महामंत्री (संगठन) नियुक्त किया है। वहीं लंबे समय से छत्तीसगढ़ संगठन से जुड़े पवन साय को झारखंड और अजय जामवाल को महाराष्ट्र की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं शिवप्रकाश को छत्तीसगढ़ समेत पांच राज्यों की संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी गई है।

भाजपा मे इस बदलाव को केवल पदों की अदला-बदली के तौर पर नहीं, बल्कि संगठन में नई कार्यशैली और नई प्राथमिकताओं के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। राजनीतिक हलकों में लंबे समय से छत्तीसगढ़ भाजपा के संगठन और सत्ता के बीच बेहतर समन्वय तथा अलग-अलग स्तरों पर सक्रिय गुटों को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। जिसका असर शासन से संगठन की छवि पर भी पड़ने की बात भी कही जाती रही है
छत्तीसगढ़ मे संगठन मे हुए इस बड़े बदलाव के बाद
कर्मवीर सिंह के पास अब प्रदेश संगठन को बूथ से लेकर प्रदेश स्तर तक अधिक सक्रिय बनाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। झारखंड में संगठनात्मक जिम्मेदारी संभालने के उनके अनुभव को देखते हुए उनसे कार्यकर्ताओं के साथ सीधा संवाद बढ़ाने, संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने और जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ मजबूत करने की अपेक्षा की जा सकती है। कहा जाता है कि बीते विधानसभा चुनाव मे सरगुजा व बस्तर संभाग मे भाजपा की कमजोर स्तिथि को देखकर इन दोनों संभागों की जिम्मेदारी गुप्त व अप्रत्यक्ष रूप से कर्मवीर सिंह को सौपी गई थी जिसके चलते ही सरगुजा मे भाजपा को सभी सीटों पर एकतरफा जीत हासिल हुईं वहीं बस्तर संभाग मे भी अच्छे खासे परिणाम पार्टी के पक्ष मे आये चर्चा है कि इसी के चलते ही कर्मवीर सिंह को अब छत्तीसगढ़ की पूरी जिम्मेदारी सौंप दी गई है

वहीं शिवप्रकाश की छत्तीसगढ़ पर राष्ट्रीय स्तर की निगरानी से संगठन और सरकार के बीच समन्वय को नई दिशा मिलने की संभावना जताई जा रही है। अब बड़ा सवाल यही है कि इस फेरबदल का असर केवल संगठनात्मक ढांचे तक सीमित रहता है या इसका प्रभाव सरकार के कामकाज पर भी दिखाई देता है।

यदि नई व्यवस्था में कार्यकर्ताओं की नियमित सुनवाई, संगठन और सरकार के बीच बेहतर संवाद तथा जनता से जुड़े मुद्दों पर तेज कार्रवाई को प्राथमिकता मिलती है, तो भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका और महत्व बढ़ सकता है। इसके साथ ही जनहित की योजनाओं और विकास कार्यों के क्रियान्वयन में तेजी लाने की अपेक्षा भी स्वाभाविक है।

फिलहाल नई नियुक्तियां भाजपा के लिए एक नए संगठनात्मक अध्याय की शुरुआत हैं। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि कर्मवीर सिंह और शिवप्रकाश की नई जिम्मेदारियां छत्तीसगढ़ भाजपा में कार्यसंस्कृति, कार्यकर्ता संवाद और सरकार-संगठन के तालमेल को किस हद तक प्रभावित करती हैं l

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