पंजाब कांग्रेस में फिर बदलाव: अध्यक्ष बदलेगा, क्या बदलेगी पार्टी की तस्वीर?

पंजाब कांग्रेस में एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन की पटकथा लिखी जा रही है। प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को हटाने का फैसला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल है—अगला अध्यक्ष कौन? खबरों के मुताबिक सचिन पायलट ने पंजाब में 50 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेकर हाईकमान को रिपोर्ट दी, जिसके बाद नेतृत्व परिवर्तन का रास्ता साफ हुआ।

नए प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में विजय इंदर सिंगला, सुखजिंदर सिंह रंधावा, परगट सिंह, गुरजीत सिंह औजला और सुखबिंदर सिंह सरकारिया समेत कई नाम चर्चा में हैं। कुछ रिपोर्टों में विजय इंदर सिंगला के नाम को हाईकमान की मंजूरी मिलने की बात भी कही गई है, हालांकि औपचारिक घोषणा को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

पंजाब मे सवाल सिर्फ वड़िंग को बदलने का नहीं, बल्कि उस गुटबाजी का है जिसने पंजाब कांग्रेस की संगठनात्मक ताकत को लगातार सुर्खियों में रखा है। वड़िंग और चरणजीत सिंह चन्नी खेमे के बीच तनातनी, नारेबाजी और कार्यकर्ता स्तर पर टकराव तक की खबरें सामने आई हैं।

इसके पहले भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी बनाना भी इसी व्यापक संगठनात्मक पुनर्संरचना का हिस्सा माना जा रहा है। अब हाईकमान के सामने चुनौती है कि नया अध्यक्ष किसी एक खेमे की पसंद न दिखे, बल्कि संगठन को चुनावी मशीनरी में बदल सके।

वहीं सवाल यह भी है कि वड़िंग के बाद क्या चन्नी खेमा शांत होगा, क्योंकि अध्यक्ष बदलने से चेहरे बदल सकते हैं, लेकिन महत्वाकांक्षाओं और गुटों का टकराव अपने आप खत्म नहीं होता। 2022 में हुए विधानसभा चुनावों मे कांग्रेस 77 से घटकर 18 सीटों पर आ गई थी; और अब 2027 से पहले पार्टी के सामने सबसे बड़ी परीक्षा यही है कि वह अपने भीतर की लड़ाई को बूथ स्तर की एकजुटता में बदल पाती है या नहीं।

राजनैतिक आकलन करने वालों का कहना है कि पंजाब कांग्रेस के लिए संदेश साफ है—अब आईना संगठन के सामने है; चेहरा बदलने से तस्वीर बदलेगी या नहीं, इसका जवाब आने वाला चुनाव देगा।

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