100 साल की UPSC यात्रा का भव्य उत्सव, PM मोदी ने जारी किया स्मारक सिक्का और डाक टिकट

प्रतिभा से प्रशासन तक… देश की सेवा के 100 वर्षों का गौरवपूर्ण पड़ाव

नई दिल्ली- देश की प्रशासनिक व्यवस्था को योग्य और सक्षम नेतृत्व देने वाली संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने अपने 100 वर्ष पूरे कर लिए। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भव्य शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री ने UPSC शताब्दी स्मारक सिक्का, स्मारक डाक टिकट और ‘100 Landmark Judgements—Shaping the Policies of UPSC and Public Service Commissions in India’ पुस्तक का विमोचन किया।

1926 में शुरू हुआ सफर, संविधान के बाद मिली संवैधानिक पहचान-

UPSC की स्थापना 1 अक्टूबर 1926 को हुई थी। बाद में यह Federal Public Service Commission के रूप में कार्यरत रहा और संविधान लागू होने के साथ 26 जनवरी 1950 को Union Public Service Commission के रूप में संवैधानिक संस्था बना। आयोग का मूल दायित्व देश की विभिन्न अखिल भारतीय और केंद्रीय सेवाओं के लिए योग्य अभ्यर्थियों का निष्पक्ष एवं पारदर्शी चयन करना है।

सिर्फ परीक्षा नहीं, राष्ट्र निर्माण का माध्यम-

UPSC की परीक्षाओं से चयनित अधिकारी भारतीय प्रशासन, पुलिस, राजस्व, विदेश सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में जिम्मेदारियां संभालते हैं। एक सदी के दौरान आयोग ने बदलते भारत की जरूरतों के अनुरूप अपनी परीक्षा प्रणाली और प्रक्रियाओं में भी बदलाव किए हैं। आयोग ने अपनी अगली यात्रा के लिए Trust, Transparency और Technology को महत्वपूर्ण मार्गदर्शक सिद्धांतों के रूप में रेखांकित किया है।

‘मंथन’ में भविष्य की सिविल सेवा पर विमर्श-

शताब्दी समारोह के तहत दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। पहले दिन ‘शताब्दी समारोह—मंथन’ में सिविल सेवाओं के बदलते स्वरूप, नवाचार, प्रशासनिक सुधार और संवैधानिक मूल्यों पर चर्चा हुई।

प्रधानमंत्री का संदेश—बदलते भारत के साथ बदले प्रशासन की भूमिका-

प्रधानमंत्री मोदी ने समारोह में UPSC की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करते हुए बदलते भारत की आकांक्षाओं के अनुरूप सार्वजनिक सेवा व्यवस्था को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। शताब्दी वर्ष का यह आयोजन केवल अतीत की उपलब्धियों का स्मरण नहीं, बल्कि भविष्य की अधिक जवाबदेह, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और जनकेंद्रित सिविल सेवा की दिशा तय करने का अवसर भी बना।

About The Author