बस्तर में भाजपा के लिए चेतावनी की घंटी-निष्ठावान कार्यकर्ता उपेक्षित, चापलूसों का बोलबाला, अफसरशाही बेलगाम

छत्तीसगढ़ – सत्ता में होने के बाद भी छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में भाजपा अपने ही घर में घिरती नजर आ रही है। निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा, चापलूसी को तरजीह और प्रशासन पर कमजोर पकड़ अब पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

कांकेर जिले में देखते ही देखते दो दिग्गज चेहरों – प्रदेश उपाध्यक्ष कोमल हुपेंडी और जनपद सदस्य भोपेश नेताम के इस्तीफे ने इस अंतर्कलह को उजागर कर दिया है। सामने आ रही जानकारी के अनुसार भोपेश नेताम ने तो सीधा आरोप लगाया कि भाजपा प्रदेश के वरिष्ठ पदाधिकारी के फोन के बावजूद अफसर ने मां के तबादले के लिए बड़ी रकम रिश्वत ले ली। उनका सवाल है कि जब सत्ता संगठन की सुनवाई नहीं तो आम जनता का क्या होगा?

प्रदेश मे कार्यकर्ताओं का दर्द अब यही है। जनप्रतिनिधि बोलते हैं, पर अधिकारी सुनते नहीं। बस्तर के कई मंडलों में शिकायत है कि छोटे कार्यकर्ता दिन-रात पार्टी का झंडा ढोते हैं, लेकिन शासकीय कार्यलयों मे उनकी कोई सुनवाई नहीं होती। वहीं चापलूसों और बिचौलियों को महत्व मिलने से पुराने, समर्पित कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है।

इसका नतीजा यह कि बस्तर मे अधिकारी बेलगाम हो गए हैं। जनप्रतिनिधियों की अनुशंसा को दरकिनार करना आम बात हो गई है। इससे जनता में संदेश जा रहा है कि शासन पर सरकार की पकड़ कमजोर है।

जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी और अफसरवाद का यह गठजोड़ अगर नहीं टूटा तो आने वाले चुनाव में भाजपा को बस्तर में बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। सियासी गलियारों में चर्चा तेज है कि मौका देख अपना मतलब साधने मे विपक्षी दल नाराज गुट से सम्पर्क बनाने की जुगत मे लग गए है जिसमे यदि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष यदि सफल हो जाते है तो कहा जा सकता है कि यह भाजपा के लिए परेशानियों के दिनों की शुरुआत होंगी l

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