ना इधर के, ना उधर के! पंजाब में कांग्रेस ने प्रगट सिंह पर लगाया दांव, चुनाव से पहले नए प्रदेश अध्यक्ष की ताजपोशी से सियासी हलचल तेज

चंडीगढ़- पंजाब में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष की कमान विधायक और पूर्व राष्ट्रीय हॉकी कप्तान प्रगट सिंह को सौंपकर सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। राजा वड़िंग और भूपेश बघेल की भूमिका से जुड़े बदलावों के बाद प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चल रही अटकलों पर हाईकमान ने अप्रत्याशित फैसला सुनाते हुए कई दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया।

दिलचस्प यह है कि प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में चार-पांच वरिष्ठ और राजनीतिक रूप से अनुभवी नेताओं के नाम चर्चा में थे, लेकिन प्रगट सिंह का नाम प्रमुख दावेदारों में कहीं नजर नहीं आ रहा था। ऐसे में उनकी नियुक्ति को कांग्रेस हाईकमान की सोची-समझी राजनीतिक रणनीति माना जा रहा है।

पंजाब की स्थानीय राजनीती मे प्रगट सिंह को चन्नी खेमे के करीब माना जाता रहा है, लेकिन उनकी अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान भी है। हालांकि संगठन और चुनावी राजनीति की कठिन कसौटी पर उनकी असली परीक्षा अब शुरू होगी।

पंजाब मे सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रगट सिंह कांग्रेस के भीतर गुटबाजी पर लगाम लगा पाएंगे? वहीं राजा वड़िंग के समर्थकों और चन्नी खेमे का उन्हें कितना सहयोग मिलेगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

पंजाव मे चुनाव सिर पर हैं और कांग्रेस के सामने केवल नया अध्यक्ष चुनने की नहीं, बल्कि बिखरे कुनबे को एकजुट करने की चुनौती है। प्रगट सिंह के सामने अब हॉकी के मैदान की तरह राजनीतिक मैदान में भी टीम को जीत की दिशा में ले जाने की जिम्मेदारी है। आंकलन किया जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान का दांव सफल हुआ तो कांग्रेस को नई संजीवनी मिल सकती है, अन्यथा गुटबाजी चुनावी संभावनाओं पर भारी पड़ सकती है।

About The Author