हिंदी के नाम पर तमिलनाडु में फिर सियासी संग्राम! हाईवे के बोर्ड से हिंदी गायब, दो अधिकारी निलंबित; भाषा की राजनीति में आखिर कब तक उलझेगा देश?
चेन्नई – सड़कें यात्रियों को मंजिल तक पहुंचाने के लिए बनती हैं, भाषाओं की सीमाएं खींचने के लिए नहीं! लेकिन तमिलनाडु में एक हाईवे साइनबोर्ड पर हिंदी के कुछ शब्द क्या दिखाई दिए, राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया। तमिल और अंग्रेजी के साथ हिंदी में स्थानों के नाम लिखे जाने पर दो राजमार्ग अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया और हिंदी लिखावट हटवा दी गई। सवाल है कि क्या यात्रियों की सुविधा से बड़ा राजनीतिक भाषा विवाद हो गया ह?
यह मामला थूथुकुडी जिले के सत्तानकुलम-नाजरेथ राज्य राजमार्ग संख्या 93 का है। सरकार ने इसे अपनी तमिल-अंग्रेजी द्विभाषा नीति का उल्लंघन बताया। लेकिन इस कार्रवाई ने एक बार फिर उस बहस को हवा दे दी है, जिसमें हिंदी को भाषा के बजाय राजनीतिक पहचान और वर्चस्व के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

तमिलनाडु में हिंदी विरोध का इतिहास पुराना है। 1960 के दशक के हिंदी-विरोधी आंदोलनों ने राज्य की भाषा राजनीति को गहराई से प्रभावित किया। तमिल भाषा और क्षेत्रीय पहचान की रक्षा का तर्क यहां की राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। मगर सवाल यह भी है कि हिंदी को अतिरिक्त सूचना भाषा के रूप में इस्तेमाल करने और उसे अनिवार्य रूप से थोपने के बीच अंतर क्यों नहीं किया जा रहा?
हाईवे पर हिंदी से आखिर परेशानी क्यों?






