पंजाब नशे की गिरफ्त में! मान सरकार पर गंभीर सवाल, आखिर नशा कारोबारियों पर कार्रवाई कब?
नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा पर सवाल, नशे के खुले कारोबार से युवाओं का भविष्य खतरे में!
चंडीगढ़ -पंजाब में नशे का बढ़ता जाल और सरकार की जवाबदेही अब सबसे बड़ा सवाल बनकर खड़ी है। जिस पंजाब की पहचान कभी मेहनत, बहादुरी और खुशहाली से होती थी, आज उसी पंजाब के भविष्य पर नशे का काला साया मंडराने के आरोप लग रहे हैं। आखिर नशे के कारोबार पर प्रभावी लगाम लगाने में सरकार कितनी सफल रही है? और अगर कार्रवाई हो रही है, तो फिर नशे की समस्या लगातार चिंता का विषय क्यों बनी हुई है?
भगवंत मान सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती नशे के अवैध कारोबार को जड़ से खत्म करने की है। विपक्ष और सरकार के आलोचक आरोप लगा रहे हैं कि नशा कारोबारियों के खिलाफ मान सरकार द्वारा सख्त कार्रवाई का अभाव उन्हें बढ़ावा व राजनैतिक संरक्षण दे रहा है। जिससे जनता के मन में उठ रहे सवालों का जवाब नहीं मिलने के कारण अब आक्रोश का कारण बनने लगा है l

पंजाब मे नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा भी गंभीर चिंता का विषय है। परविंदर सिंह द्वारा नशे को लेकर सवाल उठाने व आवाज बुलंद करने के बाद बदले मे मिली उनकी मौत से पंजाब सुलगने लगा है । और अब यदि नशे के विरुद्ध आवाज उठाने वालों को ही अपनी जान का खतरा हो, तो पंजाब मे कानून-व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
पंजाब मे नशे के कारोबार से जुड़ी दुकानों में आगजनी जैसी घटनाएं जनता के आक्रोश को दर्शाती हैं, जिससे नशे की गोलियों और प्रतिबंधित दवाओं की अवैध बिक्री पर भी सख्त निगरानी व दंड अब समय की मांग बन गई है l
अब सवाल सीधा है: क्या मान सरकार पंजाब को नशे के दलदल मे डाल रही है या फिर बाहर निकाल रहीं है , या नशे की समस्या उसके शासन की सबसे बड़ी नाकामी बनकर उभरेगी? वास्तव मे पंजाब की युवा पीढ़ी को भाषण नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए। दोषियों पर कठोर कार्रवाई, नशे की सप्लाई पर रोक और युवाओं के पुनर्वास के बिना नशामुक्त पंजाब का सपना अधूरा ही रहेगा। कहा जा सकता है कि कल तक देश मे अन्न के लिए सरताज बनने वाला पंजाब अब मान सरकार के कार्यकाल मे नशा के लिए सिरमौर बनते नजर आ रहा है?





