हैदराबाद बना अंडाणुओं के अवैध कारोबार का नया अड्डा! 43 महिलाएं मुक्त, आठ गिरफ्तार; देशभर में फैले नेटवर्क की आशंका
गरीबी को बनाया हथियार, 20 से 30 हजार का लालच देकर दूसरे राज्यों से महिलाओं को बुलाया; IVF और फर्टिलिटी कारोबार की आड़ में मानव प्रजनन क्षमता के कथित सौदे का खुलासा।
नई दिल्ली – देश में बांझपन की समस्या से जूझ रहे दंपतियों के लिए IVF तकनीक उम्मीद की किरण है, लेकिन इसी उम्मीद के इर्द-गिर्द कथित रूप से अंडाणुओं का अवैध कारोबार खड़ा होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में पुलिस ने अंतरराज्यीय अंडाणु तस्करी और व्यावसायिक शोषण के एक कथित नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 43 महिलाओं को मुक्त कराया और आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों की आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को प्रति अंडाणु दान चक्र 20 से 30 हजार रुपये देने का लालच देकर हैदराबाद लाया जाता था। उन्हें किराये के मकानों और हॉस्टलों में ठहराकर कथित तौर पर IVF और फर्टिलिटी केंद्रों तक पहुंचाया जाता था। छापेमारी में हार्मोनल इंजेक्शन, दवाएं, सिरिंज, दस्तावेज और मोबाइल फोन बरामद हुए हैं।

आखिर क्यों फल-फूल रहा है यह कारोबार?
इसके पीछे IVF उपचार की बढ़ती मांग और अंडाणु दाताओं की जरूरत प्रमुख कारण हैं। जिन महिलाओं के अंडाणुओं से गर्भधारण संभव नहीं होता, उनके लिए दूसरी महिला के अंडाणु का इस्तेमाल किया जाता है। इसी जरूरत को कथित दलाल कमाई का जरिया बनाते हैं।
किसकी जेब भरती है?
जांच के दायरे में भर्ती करने वाले एजेंट, बिचौलिये, कथित आयोजक और ART बैंक तथा IVF केंद्रों से संभावित संबंध शामिल हैं। महिलाओं को सीमित रकम का लालच मिलता है, जबकि पूरे नेटवर्क में कमीशन और बड़े आर्थिक लाभ की आशंका की जांच हो रही है।
सवाल हैदराबाद की सिर्फ 43 महिलाओं का नहीं, पूरे देश का है। क्या गरीब महिलाओं का शरीर प्रजनन उद्योग के लिए सस्ता संसाधन बनता जा रहा है? अंडाणु दान को नियंत्रित करने वाला ART अधिनियम 2021 और उसके नियम मौजूद हैं। अब जरूरत है देशभर के ART बैंकों, IVF केंद्रों, डोनर रिकॉर्ड, मेडिकल सहमति और आर्थिक लेन-देन की गहन जांच की।





