अर्नब के जख्म अभी भरे भी नहीं, अब मुरासु का महाखतरा! मौसम की मार से बेहाल छत्तीसगढ़, किसान की मेहनत पर फिर मंडराया संकट
छत्तीसगढ़ के किसानों और आम जनता की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। चक्रवात अर्नब के असर से बिगड़े मौसम और बारिश की मार से प्रदेश अभी उबर भी नहीं पाया था कि बंगाल की खाड़ी में एक और चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ ने चिंता बढ़ा दी है। आंध्र प्रदेश के तट की ओर तेजी से बढ़ रहा यह तूफान अब छत्तीसगढ़ के मौसम को भी प्रभावित कर सकता है। मौसम विभाग ने प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश और बूंदाबांदी की संभावना जताई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मौसम की इस दोहरी मार का खामियाजा कब तक किसान भुगतेंगे? खेतों में खड़ी धान की फसल, कटाई के बाद खुले आसमान के नीचे रखी उपज और मंडियों तक पहुंचने की तैयारी कर रहे किसानों की उम्मीदों पर एक बार फिर बारिश का खतरा मंडरा रहा है। पहले अर्नब ने किसानों की चिंता बढ़ाई और अब मुरासु ने उनकी नींद उड़ा दी है।

आंध्र प्रदेश में मुरासु के गंभीर चक्रवात में बदलने और तेज हवाओं के साथ तट से टकराने की आशंका है। इसके प्रभाव से छत्तीसगढ़ में भी बादल, बारिश और मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
विडंबना देखिए, किसान दिन-रात मेहनत करके फसल तैयार करता है, लेकिन जब मेहनत का फल घर लाने का वक्त आता है, तब कभी बेमौसम बारिश तो कभी चक्रवात उसकी उम्मीदों पर पानी फेरने को तैयार खड़े रहते हैं।
सवाल सरकार और प्रशासन से भी है: क्या किसानों की फसल बचाने के लिए पर्याप्त इंतजाम हैं? क्या खुले में रखे धान को सुरक्षित रखने की व्यवस्था है? क्या प्रभावित किसानों को समय पर मुआवजा मिलेगा?
मौसम की मार सिर्फ बादलों की बरसात नहीं, किसान के पसीने और परिवार की रोटी पर संकट है। अब जरूरत सिर्फ अलर्ट जारी करने की नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत और आम जनता की सुरक्षा के लिए जमीन पर ठोस इंतजाम करने की है।





