स्कूलों में हैलोवीन आयोजनों पर लगे प्रतिबंध, बच्चों को भारतीय संस्कारों से जोड़ने की जरूरत

पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण पर उठे सवाल, जिला शिक्षा अधिकारी से सख्त कार्रवाई की मांग
छत्तीसगढ़ – आजकल छत्तीसगढ़ के कुछ स्कूलों में पश्चिमी देशों की संस्कृति का अंधानुकरण करते हुए हैलोवीन (Halloween) उत्सव मनाया जा रहा है। इस आयोजन में बच्चों को भूत-प्रेत, चुड़ैल और डरावने चेहरे बनाकर प्रस्तुत किया जाता है। सवाल यह है कि आखिर ऐसे आयोजनों के माध्यम से स्कूल बच्चों को कौन से संस्कार और कैसी संस्कृति दे रहे हैं?

शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि हैलोवीन पश्चिमी देशों की सांस्कृतिक परंपरा है, जिसे भारतीय शैक्षणिक परिवेश में बढ़ावा देना उचित नहीं है। भारतीय संस्कृति सदैव सकारात्मक विचारों, नैतिक मूल्यों, सद्भाव, संस्कारों और जीवन के प्रति सम्मान की शिक्षा देती आई है। ऐसे में स्कूलों द्वारा बच्चों को डरावने रूप धारण करवाकर उनका प्रदर्शन करना भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

इस संबंध में शिक्षाविद सतीश उपाध्याय ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ मे शासन, शिक्षा मंत्रालय और शिक्षा विभाग को ऐसे आयोजनों पर गंभीरता से विचार व कार्यवाही करना चाहिए। स्कूलों का उद्देश्य बच्चों में ज्ञान, चरित्र निर्माण और भारतीय संस्कारों का विकास करना होना चाहिए, न कि विदेशी परंपराओं का अंधानुकरण करना।

उन्होंने मांग की कि जिला शिक्षा अधिकारी ऐसे स्कूलों को तत्काल चेतावनी पत्र जारी करें और अगले शैक्षणिक वर्ष से हैलोवीन जैसे आयोजनों पर प्रतिबंध लगाने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करें। भारतीय संस्कृति और संस्कारों की रक्षा के लिए शिक्षा विभाग को ऐसे स्कूल प्रबंधन के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

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